### परिचय (Introduction) कक्षा 12 भौतिकी के इस अध्याय में, हम इलेक्ट्रोस्टैटिक्स (Electrostatics) की मूलभूत अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। इलेक्ट्रोस्टैटिक्स भौतिकी की वह शाखा है जो स्थिर विद्युत आवेशों (stationary electric charges) और उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले बलों, क्षेत्रों और विभवों से संबंधित है। यह अध्याय विद्युत आवेशों के गुणों, कूलॉम के नियम, विद्युत क्षेत्र, विद्युत क्षेत्र रेखाओं, विद्युत द्विध्रुव और गॉस के नियम जैसे महत्वपूर्ण विषयों को कवर करता है। **इलेक्ट्रोस्टैटिक्स (स्थिरवैद्युतिकी):** यह भौतिकी की वह शाखा है जो उन प्रभावों का अध्ययन करती है जो स्थिर विद्युत आवेशों द्वारा उत्पन्न होते हैं और उन पर कार्य करते हैं। ### विद्युत आवेश (Electric Charge) **परिभाषा:** विद्युत आवेश पदार्थ का एक मौलिक आंतरिक गुण है जिसके कारण वह विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है और अनुभव करता है। यह पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या के असंतुलन के कारण होता है। * **आवेश के प्रकार:** 1. **धनात्मक आवेश (Positive Charge):** प्रोटॉन पर पाया जाता है (इलेक्ट्रॉनों की कमी)। 2. **ऋणात्मक आवेश (Negative Charge):** इलेक्ट्रॉन पर पाया जाता है (इलेक्ट्रॉनों की अधिकता)। * सजातीय आवेश (Like charges) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विजातीय आवेश (Unlike charges) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। * **आवेश की SI इकाई:** कूलॉम (Coulomb, C) * **परिभाषा:** 1 कूलॉम वह आवेश है जो 1 एम्पीयर की धारा को 1 सेकंड तक प्रवाहित करने पर प्राप्त होता है। $1 \text{ C} = 1 \text{ A} \cdot \text{s}$। * **CGS इकाई:** स्टेटकूलॉम (Statcoulomb) या ई.एस.यू. (e.s.u. - electrostatic unit) * $1 \text{ C} \approx 3 \times 10^9 \text{ statcoulomb}$ * मूल आवेश (Elementary charge), $e = 1.602 \times 10^{-19} \text{ C}$ * **आवेश का विमीय सूत्र:** $[A^1 T^1]$ * क्योंकि विद्युत धारा $I = Q/t$, अतः $Q = I \times t$। * धारा की विमा $[A]$ और समय की विमा $[T]$ है। * **आवेश के मौलिक गुण:** 1. **आवेश का संरक्षण (Conservation of Charge):** किसी पृथक निकाय (isolated system) का कुल विद्युत आवेश हमेशा संरक्षित रहता है। इसे न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल एक निकाय से दूसरे निकाय में स्थानांतरित किया जा सकता है। * उदाहरण: रेडियोधर्मी क्षय, युग्म उत्पादन (pair production) और युग्म विनाश (pair annihilation)। 2. **आवेश का क्वांटमीकरण (Quantization of Charge):** किसी भी निकाय पर कुल आवेश हमेशा मूल आवेश ($e$) का एक पूर्णांक गुणज होता है। इसका अर्थ है कि आवेश अविभाज्य इकाइयों में मौजूद होता है। * $Q = \pm ne$ * जहाँ $n = 1, 2, 3, ...$ (एक पूर्णांक) * क्वांटमीकरण की खोज फैराडे ने अपने विद्युत अपघटन के नियमों से की थी, और मिलिकन के तेल बूंद प्रयोग (Millikan's oil drop experiment) द्वारा इसकी प्रायोगिक पुष्टि की गई। 3. **आवेश की योज्यता (Additivity of Charge):** किसी निकाय का कुल आवेश उसके विभिन्न भागों पर उपस्थित सभी अलग-अलग आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। * यदि किसी निकाय में $q_1, q_2, q_3, ..., q_n$ आवेश हैं, तो कुल आवेश $Q_{कुल} = q_1 + q_2 + q_3 + ... + q_n$। 4. **आवेश की निश्चरता (Invariance of Charge):** आवेश का मान प्रेक्षक की गति पर निर्भर नहीं करता है। एक आवेशित कण पर आवेश का मान स्थिर रहता है, चाहे वह स्थिर हो या गति में हो। * **किसी वस्तु को आवेशित करने के तरीके (Methods of Charging an Object):** 1. **घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Friction / Triboelectric Charging):** जब दो भिन्न पदार्थों को आपस में रगड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में स्थानांतरित हो जाते हैं। जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है वह धनावेशित हो जाता है, और जो इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है वह ऋणावेशित हो जाता है। * उदाहरण: कांच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर कांच धनावेशित और रेशम ऋणावेशित हो जाता है। सूखे बालों में कंघी करने पर कंघी आवेशित हो जाती है। 2. **चालन द्वारा आवेशन (Charging by Conduction):** जब एक आवेशित वस्तु को एक अनावेशित चालक के संपर्क में लाया जाता है, तो आवेश आवेशित वस्तु से अनावेशित चालक में स्थानांतरित हो जाता है, जिससे अनावेशित चालक भी उसी प्रकार से आवेशित हो जाता है। आवेश समान प्रकार का होता है। 3. **प्रेरण द्वारा आवेशन (Charging by Induction):** बिना किसी भौतिक संपर्क के एक अनावेशित चालक को आवेशित करना। * **प्रक्रिया:** * एक अनावेशित चालक गोले के पास एक आवेशित छड़ लाई जाती है (बिना स्पर्श किए)। * आवेशित छड़ के कारण गोले में मुक्त इलेक्ट्रॉन आकर्षित या प्रतिकर्षित होते हैं, जिससे गोले के एक सिरे पर विपरीत आवेश और दूसरे सिरे पर समान आवेश प्रेरित होते हैं। * गोले को भू-संपर्कित (earthing) करने पर, समान आवेश पृथ्वी में चले जाते हैं। * भू-संपर्क हटाकर, फिर आवेशित छड़ को हटाने पर गोला छड़ के विपरीत आवेश से स्थायी रूप से आवेशित हो जाता है। * प्रेरित आवेश हमेशा विपरीत प्रकृति का होता है। ### कूलॉम का नियम (Coulomb's Law) **परिभाषा:** दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत बल उनके आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल हमेशा दोनों आवेशों को मिलाने वाली सीधी रेखा के अनुदिश कार्य करता है। * **गणितीय सूत्र (Scalar Form):** * $F = k \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$ * जहाँ: * $F$ = दो आवेशों के बीच विद्युत बल (आकर्षण या प्रतिकर्षण) * $q_1, q_2$ = दो बिंदु आवेशों के परिमाण * $r$ = आवेशों के केंद्रों के बीच की दूरी * $k$ = आनुपातिकता स्थिरांक, जिसे कूलॉम स्थिरांक कहते हैं। * निर्वात (vacuum) के लिए: $k = \frac{1}{4\pi\epsilon_0}$ * $\epsilon_0$ (एप्साइलन नॉट) = मुक्त आकाश की परावैद्युतांक (Permittivity of Free Space) * $\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2/\text{Nm}^2$ * $k \approx 9 \times 10^9 \text{ Nm}^2/\text{C}^2$ * **मुक्त आकाश की परावैद्युतांक ($\epsilon_0$):** * यह दर्शाता है कि निर्वात अपने माध्यम से विद्युत क्षेत्र रेखाओं को कितनी अच्छी तरह से गुजरने देता है। * **विमीय सूत्र:** $[\text{M}^{-1} \text{L}^{-3} \text{T}^4 \text{A}^2]$ * व्युत्पत्ति: $F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \implies \epsilon_0 = \frac{1}{4\pi F} \frac{q_1 q_2}{r^2}$ * विमाएँ: $\frac{[A T]^2}{[M L T^{-2}] [L]^2} = \frac{[A^2 T^2]}{[M L^3 T^{-2}]} = [M^{-1} L^{-3} T^4 A^2]$ * **माध्यम में कूलॉम का नियम:** * जब आवेश किसी माध्यम में रखे होते हैं, तो उनके बीच का बल निर्वात की तुलना में कम हो जाता है। * माध्यम की निरपेक्ष परावैद्युतांक (Absolute permittivity) $\epsilon$ होती है। * $F_{माध्यम} = \frac{1}{4\pi\epsilon} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$ * **आपेक्षिक परावैद्युतांक (Relative Permittivity) या परावैद्युतांक (Dielectric Constant), $K$ या $\epsilon_r$:** * $K = \epsilon_r = \frac{\epsilon}{\epsilon_0}$ * $K$ एक विमाहीन राशि है। * निर्वात के लिए $K=1$, वायु के लिए लगभग $1.00059$, शुद्ध जल के लिए लगभग $80$, धातुओं के लिए $K=\infty$। * अतः, $F_{माध्यम} = \frac{1}{4\pi K\epsilon_0} \frac{|q_1 q_2|}{r^2} = \frac{F_{निर्वात}}{K}$ * इससे पता चलता है कि किसी माध्यम में आवेशों के बीच का बल निर्वात में बल की तुलना में $K$ गुना कम हो जाता है। * **कूलॉम के नियम का सदिश रूप (Vector Form of Coulomb's Law):** * यह बल की दिशा को भी दर्शाता है। * माना आवेश $q_1$ का स्थिति सदिश $\vec{r}_1$ और $q_2$ का $\vec{r}_2$ है। * आवेश $q_1$ द्वारा $q_2$ पर लगाया गया बल, $\vec{F}_{21}$: * $\vec{F}_{21} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{|\vec{r}_{21}|^2} \hat{r}_{21} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{|\vec{r}_2 - \vec{r}_1|^3} (\vec{r}_2 - \vec{r}_1)$ * जहाँ $\vec{r}_{21} = \vec{r}_2 - \vec{r}_1$ आवेश $q_1$ से $q_2$ की ओर का विस्थापन सदिश है, और $\hat{r}_{21}$ इकाई सदिश है। * आवेश $q_2$ द्वारा $q_1$ पर लगाया गया बल, $\vec{F}_{12}$: * $\vec{F}_{12} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{|\vec{r}_{12}|^2} \hat{r}_{12} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q_1 q_2}{|\vec{r}_1 - \vec{r}_2|^3} (\vec{r}_1 - \vec{r}_2)$ * जहाँ $\vec{r}_{12} = \vec{r}_1 - \vec{r}_2$ आवेश $q_2$ से $q_1$ की ओर का विस्थापन सदिश है। * चूँकि $\vec{r}_{12} = -\vec{r}_{21}$, अतः $\vec{F}_{12} = -\vec{F}_{21}$। यह न्यूटन के गति के तीसरे नियम की पुष्टि करता है (क्रिया-प्रतिक्रिया बल)। * **अध्यारोपण का सिद्धांत (Principle of Superposition):** * जब किसी निकाय में कई आवेश मौजूद होते हैं, तो किसी एक आवेश पर लगने वाला कुल बल अन्य सभी आवेशों द्वारा उस पर लगाए गए अलग-अलग बलों के सदिश योग के बराबर होता है। * यदि एक आवेश $q_1$ पर $q_2, q_3, ..., q_n$ द्वारा बल लगाया जाता है, तो कुल बल: * $\vec{F}_1 = \vec{F}_{12} + \vec{F}_{13} + ... + \vec{F}_{1n}$ * $\vec{F}_1 = \sum_{i=2}^{n} \vec{F}_{1i} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \sum_{i=2}^{n} \frac{q_1 q_i}{|\vec{r}_1 - \vec{r}_i|^3} (\vec{r}_1 - \vec{r}_i)$ * यह सिद्धांत कूलॉम के नियम की रैखिकता (linearity) को दर्शाता है। ### विद्युत क्षेत्र (Electric Field) **परिभाषा:** किसी आवेश या आवेशों के निकाय के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य आवेश विद्युत बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है। * **विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field Intensity) या विद्युत क्षेत्र (Electric Field), $\vec{E}$:** * किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर रखे गए एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश (unit positive test charge, $q_0$) द्वारा अनुभव किए गए विद्युत बल के बराबर होती है। परीक्षण आवेश इतना छोटा होना चाहिए कि वह स्रोत आवेश के वितरण को प्रभावित न करे। * $\vec{E} = \lim_{q_0 \to 0} \frac{\vec{F}}{q_0}$ * **SI इकाई:** न्यूटन प्रति कूलॉम (N/C) या वोल्ट प्रति मीटर (V/m) * **विमीय सूत्र:** $[\text{M}^1 \text{L}^1 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ * व्युत्पत्ति: $E = F/Q = [M L T^{-2}] / [A T] = [M L T^{-3} A^{-1}]$ * विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है, जिसकी दिशा धनात्मक परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल की दिशा में होती है। * **बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र (Electric Field due to a Point Charge):** * एक बिंदु आवेश $Q$ से $r$ दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता: * $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{|Q|}{r^2}$ * सदिश रूप में: $\vec{E} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r^2} \hat{r}$ * यदि $Q$ धनात्मक है, तो $\vec{E}$ रेडियल रूप से बाहर की ओर (आवेश से दूर)। * यदि $Q$ ऋणात्मक है, तो $\vec{E}$ रेडियल रूप से अंदर की ओर (आवेश की ओर)। * **आवेशों के निकाय के कारण विद्युत क्षेत्र (Electric Field due to a System of Charges):** * अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार, कई आवेशों के कारण किसी बिंदु पर कुल विद्युत क्षेत्र सभी अलग-अलग आवेशों के कारण उस बिंदु पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्रों के सदिश योग के बराबर होता है। * $\vec{E} = \vec{E}_1 + \vec{E}_2 + ... + \vec{E}_n = \sum_{i=1}^{n} \vec{E}_i$ * $\vec{E} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \sum_{i=1}^{n} \frac{q_i}{|\vec{r} - \vec{r}_i|^3} (\vec{r} - \vec{r}_i)$ * **सतत आवेश वितरण (Continuous Charge Distribution):** * जब आवेश एक क्षेत्र में लगातार वितरित होता है, तो हम इसे छोटे-छोटे असीमित आवेश तत्वों में विभाजित करते हैं और समाकलन का उपयोग करके विद्युत क्षेत्र की गणना करते हैं। 1. **रेखीय आवेश घनत्व (Linear Charge Density, $\lambda$):** प्रति इकाई लंबाई आवेश। * $\lambda = \frac{dQ}{dL}$ (या $Q/L$ यदि एकसमान हो) * SI इकाई: C/m 2. **पृष्ठीय आवेश घनत्व (Surface Charge Density, $\sigma$):** प्रति इकाई क्षेत्रफल आवेश। * $\sigma = \frac{dQ}{dA}$ (या $Q/A$ यदि एकसमान हो) * SI इकाई: C/m$^2$ 3. **आयतन आवेश घनत्व (Volume Charge Density, $\rho$):** प्रति इकाई आयतन आवेश। * $\rho = \frac{dQ}{dV}$ (या $Q/V$ यदि एकसमान हो) * SI इकाई: C/m$^3$ * एक सतत आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र: * $\vec{E} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \int \frac{dQ}{r^2} \hat{r}$ * जहाँ $dQ$ को $\lambda dL$, $\sigma dA$, या $\rho dV$ से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। ### विद्युत क्षेत्र रेखाएँ (Electric Field Lines) **परिभाषा:** विद्युत क्षेत्र रेखाएँ वे काल्पनिक वक्र हैं जो किसी विद्युत क्षेत्र में खींचे जाते हैं ताकि किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा को दर्शाए। * **गुणधर्म (Properties):** 1. ये धनात्मक आवेश से प्रारंभ होती हैं और ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं। (यदि एकल आवेश हो तो अनंत से आती या अनंत तक जाती हैं)। 2. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक दूसरे को नहीं काटतीं। यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं, जो भौतिक रूप से संभव नहीं है। 3. क्षेत्र रेखाओं की सघनता (निकटता) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Strength) को दर्शाती है। जहाँ रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक तीव्र होता है। 4. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ खुले वक्र बनाती हैं (बंद लूप नहीं बनातीं)। (यह चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं से भिन्न है, जो बंद लूप बनाती हैं)। 5. चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ नहीं होतीं, जिसका अर्थ है कि चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है (स्थिरवैद्युतिकी संतुलन में)। 6. क्षेत्र रेखाएँ हमेशा चालक की सतह के लंबवत होती हैं। 7. क्षेत्र रेखाएँ अपनी लंबाई के अनुदिश सिकुड़ने का प्रयास करती हैं (जो विपरीत आवेशों के बीच आकर्षण को दर्शाता है)। 8. क्षेत्र रेखाएँ अपनी लंबाई के लंबवत दिशा में एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं (जो समान आवेशों के बीच प्रतिकर्षण को दर्शाता है)। * **विद्युत क्षेत्र रेखाओं का निरूपण (Diagrams):** * **एकल धनात्मक आवेश (+Q):** रेडियल रूप से बाहर की ओर जाती हुई सीधी रेखाएँ। * **एकल ऋणात्मक आवेश (-Q):** रेडियल रूप से अंदर की ओर आती हुई सीधी रेखाएँ। * **समान और विपरीत आवेश (विद्युत द्विध्रुव):** धनात्मक से ऋणात्मक की ओर वक्र रेखाएँ। * **दो समान धनात्मक आवेश:** एक दूसरे को प्रतिकर्षित करती हुई रेखाएँ, बीच में एक उदासीन बिंदु (neutral point) जहाँ क्षेत्र शून्य होता है। ### विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) **परिभाषा:** एक विद्युत द्विध्रुव दो समान परिमाण के, परंतु विपरीत प्रकृति के बिंदु आवेशों ($+q$ और $-q$) का एक युग्म होता है, जो एक दूसरे से बहुत कम दूरी ($2a$) पर स्थित होते हैं। * **विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole Moment), $\vec{p}$:** * यह आवेश के परिमाण ($q$) और दोनों आवेशों के बीच की दूरी ($2a$) के गुणनफल के बराबर होता है। * $p = q \times 2a$ * **SI इकाई:** कूलॉम-मीटर (C m) * **विमीय सूत्र:** $[\text{L}^1 \text{T}^1 \text{A}^1]$ * यह एक सदिश राशि है, जिसकी दिशा हमेशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है। * **विद्युत द्विध्रुव के कारण विद्युत क्षेत्र (Electric Field due to an Electric Dipole):** 1. **अक्षीय रेखा पर (On Axial Line):** द्विध्रुव के केंद्र से $r$ दूरी पर अक्ष पर स्थित बिंदु P पर। * $E_{अक्षीय} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - a^2)^2}$ * **लघु द्विध्रुव (Short Dipole) के लिए:** यदि $r \gg a$, तो $a^2$ को नगण्य मान सकते हैं। * $E_{अक्षीय} \approx \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2pr}{(r^2)^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2p}{r^3}$ * **दिशा:** द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ की दिशा में। * **व्युत्पत्ति:** * आवेश $+q$ के कारण बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र: $\vec{E}_+ = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{(r-a)^2} \hat{p}$ (द्विध्रुव की दिशा में) * आवेश $-q$ के कारण बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र: $\vec{E}_- = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{(r+a)^2} (-\hat{p})$ (द्विध्रुव की दिशा के विपरीत) * कुल विद्युत क्षेत्र $\vec{E}_{अक्षीय} = \vec{E}_+ + \vec{E}_-$ * $E_{अक्षीय} = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \left[ \frac{1}{(r-a)^2} - \frac{1}{(r+a)^2} \right]$ * $E_{अक्षीय} = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \left[ \frac{(r+a)^2 - (r-a)^2}{(r^2 - a^2)^2} \right]$ * $E_{अक्षीय} = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \left[ \frac{(r^2+a^2+2ra) - (r^2+a^2-2ra)}{(r^2 - a^2)^2} \right]$ * $E_{अक्षीय} = \frac{q}{4\pi\epsilon_0} \frac{4ra}{(r^2 - a^2)^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{(q \cdot 2a) \cdot 2r}{(r^2 - a^2)^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2pr}{(r^2 - a^2)^2}$ 2. **निरक्षीय रेखा पर (On Equatorial Line / Perpendicular Bisector):** द्विध्रुव के केंद्र से $r$ दूरी पर, द्विध्रुव के लंब समद्विभाजक पर स्थित बिंदु P पर। * $E_{निरक्षीय} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{(r^2 + a^2)^{3/2}}$ * **लघु द्विध्रुव (Short Dipole) के लिए:** यदि $r \gg a$, तो $a^2$ को नगण्य मान सकते हैं। * $E_{निरक्षीय} \approx \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{(r^2)^{3/2}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3}$ * **दिशा:** द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ की दिशा के विपरीत। * **व्युत्पत्ति:** * आवेश $+q$ के कारण बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण: $E_+ = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{(r^2+a^2)}$ * आवेश $-q$ के कारण बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण: $E_- = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{(r^2+a^2)}$ * चूंकि $E_+ = E_-$, इन दोनों सदिशों के ऊर्ध्वाधर घटक एक दूसरे को निरस्त कर देंगे। क्षैतिज घटक जुड़ जाएंगे। * माना $\theta$ वह कोण है जो $E_+$ (या $E_-$) सदिश निरक्षीय रेखा से बनाता है। तो, $\cos\theta = \frac{a}{\sqrt{r^2+a^2}}$। * कुल विद्युत क्षेत्र $E_{निरक्षीय} = E_+ \cos\theta + E_- \cos\theta = 2 E_+ \cos\theta$ * $E_{निरक्षीय} = 2 \cdot \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{(r^2+a^2)} \cdot \frac{a}{\sqrt{r^2+a^2}}$ * $E_{निरक्षीय} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2qa}{(r^2+a^2)^{3/2}} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{(r^2+a^2)^{3/2}}$ * दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर के विपरीत होती है। * **एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण (Torque on a Dipole in a Uniform Electric Field):** * जब एक विद्युत द्विध्रुव को एकसमान विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ में रखा जाता है, तो आवेशों पर बराबर और विपरीत बल ($+q\vec{E}$ और $-q\vec{E}$) लगते हैं। ये बल एक युग्म (couple) बनाते हैं, जो द्विध्रुव पर एक बल आघूर्ण उत्पन्न करता है। शुद्ध बल शून्य होता है। * बल आघूर्ण $\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E}$ * परिमाण: $\tau = pE \sin\theta$ * जहाँ $\theta$ द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ और विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ के बीच का कोण है। * **SI इकाई:** न्यूटन-मीटर (Nm) * **विमीय सूत्र:** $[M^1 L^2 T^{-2}]$ * **व्युत्पत्ति:** * आवेश $+q$ पर बल: $\vec{F}_+ = q\vec{E}$ * आवेश $-q$ पर बल: $\vec{F}_- = -q\vec{E}$ * शुद्ध बल: $\vec{F}_{नेट} = \vec{F}_+ + \vec{F}_- = q\vec{E} - q\vec{E} = 0$ * बल आघूर्ण = बल का परिमाण $\times$ बलों के बीच की लंबवत दूरी * लंबवत दूरी = $2a \sin\theta$ * $\tau = (qE) (2a \sin\theta) = (q \cdot 2a) E \sin\theta = pE \sin\theta$ * **स्थायी संतुलन (Stable Equilibrium):** जब $\theta = 0^\circ$, $\tau = 0$ और द्विध्रुव क्षेत्र के समानांतर होता है। * **अस्थायी संतुलन (Unstable Equilibrium):** जब $\theta = 180^\circ$, $\tau = 0$ और द्विध्रुव क्षेत्र के प्रति-समानांतर होता है। * **अधिकतम बल आघूर्ण:** जब $\theta = 90^\circ$, $\tau_{max} = pE$। * **एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of a Dipole in a Uniform Electric Field):** * यह वह कार्य है जो द्विध्रुव को अनंत से (या किसी संदर्भ स्थिति से) किसी विशेष अभिविन्यास में विद्युत क्षेत्र में लाने में किया जाता है। * $U = -\vec{p} \cdot \vec{E} = -pE \cos\theta$ * **SI इकाई:** जूल (J) * **विमीय सूत्र:** $[M^1 L^2 T^{-2}]$ * **व्युत्पत्ति:** बल आघूर्ण के विरुद्ध द्विध्रुव को कोण $\theta_1$ से $\theta_2$ तक घुमाने में किया गया कार्य: * $dW = \tau d\theta = pE \sin\theta d\theta$ * $W = \int_{\theta_1}^{\theta_2} pE \sin\theta d\theta = pE [-\cos\theta]_{\theta_1}^{\theta_2} = pE (\cos\theta_1 - \cos\theta_2)$ * स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित करने के लिए, हम संदर्भ बिंदु के रूप में $\theta_1 = 90^\circ$ लेते हैं, जहाँ स्थितिज ऊर्जा शून्य मानी जाती है। * तो, $U(\theta) = pE (\cos 90^\circ - \cos\theta) = pE (0 - \cos\theta) = -pE \cos\theta$ * **न्यूनतम ऊर्जा (अधिकतम स्थिरता):** जब $\theta = 0^\circ$, $U = -pE$ (स्थायी संतुलन)। * **अधिकतम ऊर्जा (न्यूनतम स्थिरता):** जब $\theta = 180^\circ$, $U = +pE$ (अस्थायी संतुलन)। * जब $\theta = 90^\circ$, $U = 0$। ### गॉस का नियम (Gauss's Law) **परिभाषा:** किसी भी बंद पृष्ठ (जिसे गाउसीय पृष्ठ कहा जाता है) से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध (enclosed) कुल आवेश का $1/\epsilon_0$ गुना होता है। * **विद्युत फ्लक्स (Electric Flux), $\Phi_E$:** * किसी सतह से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या का माप। यह एक अदिश राशि है। * $\Phi_E = \vec{E} \cdot \vec{A} = EA \cos\theta$ (एकसमान क्षेत्र $\vec{E}$ और समतल सतह $\vec{A}$ के लिए, जहाँ $\theta$ क्षेत्र सदिश और क्षेत्रफल सदिश के बीच का कोण है) * सामान्यतः, $\Phi_E = \int \vec{E} \cdot d\vec{A}$ * **SI इकाई:** न्यूटन-मीटर$^2$ प्रति कूलॉम (Nm$^2$/C) या वोल्ट-मीटर (Vm) * **विमीय सूत्र:** $[\text{M}^1 \text{L}^3 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ * व्युत्पत्ति: $\Phi_E = E \cdot A = [M L T^{-3} A^{-1}] [L^2] = [M L^3 T^{-3} A^{-1}]$ * **गॉस के नियम का गणितीय सूत्र:** * $\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q_{अंदर}}{\epsilon_0}$ * जहाँ: * $\oint$ = बंद पृष्ठ पर समाकलन * $Q_{अंदर}$ = बंद गाउसीय पृष्ठ के अंदर स्थित कुल आवेश * $\epsilon_0$ = मुक्त आकाश की परावैद्युतांक * **महत्वपूर्ण बिंदु:** * गाउसीय पृष्ठ मनमाना हो सकता है, लेकिन गणना को सरल बनाने के लिए सममित पृष्ठों का चयन किया जाता है। * यह नियम कूलॉम के नियम का एक वैकल्पिक रूप है और दोनों एक दूसरे के समतुल्य हैं। * $Q_{अंदर}$ में केवल वे आवेश शामिल होते हैं जो गाउसीय पृष्ठ के अंदर होते हैं, बाहर के आवेश फ्लक्स में योगदान नहीं करते (यद्यपि वे विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ को प्रभावित करते हैं)। * **गॉस के नियम के अनुप्रयोग (Applications of Gauss's Law):** गॉस का नियम अत्यधिक सममित आवेश वितरणों के कारण विद्युत क्षेत्र की गणना को सरल बनाता है। 1. **अनंत लंबाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र:** * माना तार का रेखीय आवेश घनत्व $\lambda$ है। * गाउसीय पृष्ठ: तार के अक्ष के साथ केंद्रित $L$ लंबाई और $r$ त्रिज्या का एक बेलनाकार पृष्ठ। * बेलन के अंदर आवेश: $Q_{अंदर} = \lambda L$ * विद्युत फ्लक्स: * वृत्ताकार सिरों से फ्लक्स शून्य होगा क्योंकि $\vec{E}$ रेडियल रूप से बाहर की ओर है और $d\vec{A}$ अक्ष के समानांतर है ($\theta = 90^\circ$)। * वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल से फ्लक्स: $\Phi_E = E \cdot (2\pi r L)$ (क्योंकि $\vec{E}$ और $d\vec{A}$ समानांतर हैं)। * गॉस के नियम से: $E (2\pi r L) = \frac{\lambda L}{\epsilon_0}$ * $E = \frac{\lambda}{2\pi\epsilon_0 r}$ * दिशा: तार से लंबवत बाहर की ओर (धनात्मक $\lambda$ के लिए)। 2. **एकसमान आवेशित अनंत समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र:** * माना चादर का पृष्ठीय आवेश घनत्व $\sigma$ है। * गाउसीय पृष्ठ: चादर के लंबवत अक्ष वाला एक बेलनाकार या घनाभ पृष्ठ, जिसका एक सिरा चादर के एक तरफ और दूसरा सिरा दूसरी तरफ है। * बेलन के अंदर आवेश: $Q_{अंदर} = \sigma A$ (जहाँ $A$ बेलन के सिरों का क्षेत्रफल है)। * विद्युत फ्लक्स: * वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल से फ्लक्स शून्य होगा क्योंकि $\vec{E}$ चादर के लंबवत है और $d\vec{A}$ वक्र सतह पर लंबवत है। * दोनों वृत्ताकार सिरों से फ्लक्स: $\Phi_E = EA + EA = 2EA$ (क्योंकि $\vec{E}$ और $d\vec{A}$ समानांतर हैं)। * गॉस के नियम से: $2EA = \frac{\sigma A}{\epsilon_0}$ * $E = \frac{\sigma}{2\epsilon_0}$ * दिशा: चादर के लंबवत बाहर की ओर (धनात्मक $\sigma$ के लिए)। यह दूरी पर निर्भर नहीं करता। 3. **एकसमान आवेशित पतले गोलीय कोश (Thin Spherical Shell) के कारण विद्युत क्षेत्र:** * माना गोलीय कोश की त्रिज्या $R$ और उस पर कुल आवेश $Q$ एकसमान रूप से वितरित है। * गाउसीय पृष्ठ: $r$ त्रिज्या का एक संकेंद्रित गोला। * **केस 1: कोश के बाहर किसी बिंदु पर ($r > R$):** * गाउसीय गोले के अंदर आवेश: $Q_{अंदर} = Q$ * गॉस के नियम से: $E (4\pi r^2) = \frac{Q}{\epsilon_0}$ * $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r^2}$ * यह ऐसा व्यवहार करता है जैसे सारा आवेश केंद्र पर केंद्रित हो। * **केस 2: कोश की सतह पर किसी बिंदु पर ($r = R$):** * $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R^2}$ * **केस 3: कोश के अंदर किसी बिंदु पर ($r R$):** * गाउसीय गोले के अंदर आवेश: $Q_{अंदर} = Q$ * $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r^2}$ (यह एक बिंदु आवेश की तरह व्यवहार करता है) * **केस 2: गोले की सतह पर किसी बिंदु पर ($r = R$):** * $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R^2}$ * **केस 3: गोले के अंदर किसी बिंदु पर ($r ### सारांश तालिका (Revision Table) | अवधारणा (Concept) | सूत्र (Formula) | SI इकाई (SI Unit) | विमीय सूत्र (Dimensional Formula) | विवरण (Description) | | :------------------------ | :---------------------------------------------------------------------------------- | :--------------------------- | :------------------------------------- | :------------------------------------------------------------------------- | | विद्युत आवेश (Q) | $Q = \pm ne$ | कूलॉम (C) | $[A^1 T^1]$ | पदार्थ का मौलिक गुण जो विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है। | | कूलॉम का नियम (F) | $F = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{|q_1 q_2|}{r^2}$ | न्यूटन (N) | $[M^1 L^1 T^{-2}]$ | दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल। | | मुक्त आकाश की परावैद्युतांक ($\epsilon_0$) | $8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2/\text{Nm}^2$ | $\text{C}^2/\text{Nm}^2$ | $[\text{M}^{-1} \text{L}^{-3} \text{T}^4 \text{A}^2]$ | निर्वात में विद्युत क्षेत्र की अनुमति। | | आपेक्षिक परावैद्युतांक (K) | $K = \epsilon / \epsilon_0$ | विमाहीन (Dimensionless) | $[M^0 L^0 T^0 A^0]$ | माध्यम की विद्युतशीलता की निर्वात से तुलना। | | विद्युत क्षेत्र (E) | $\vec{E} = \frac{\vec{F}}{q_0}$ या $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r^2}$ | N/C या V/m | $[\text{M}^1 \text{L}^1 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ | एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश द्वारा अनुभव किया गया बल। | | विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (p) | $p = q \times 2a$ | कूलॉम-मीटर (C m) | $[\text{L}^1 \text{T}^1 \text{A}^1]$ | द्विध्रुव की शक्ति और दिशा का माप। | | द्विध्रुव के कारण E (अक्षीय) | $E_{अक्षीय} \approx \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2p}{r^3}$ (लघु द्विध्रुव) | N/C | $[\text{M}^1 \text{L}^1 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ | अक्ष पर क्षेत्र (द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा में)। | | द्विध्रुव के कारण E (निरक्षीय)| $E_{निरक्षीय} \approx \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3}$ (लघु द्विध्रुव) | N/C | $[\text{M}^1 \text{L}^1 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ | निरक्षीय रेखा पर क्षेत्र (द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा के विपरीत)। | | बल आघूर्ण ($\tau$) | $\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E}$ या $\tau = pE \sin\theta$ | न्यूटन-मीटर (Nm) | $[M^1 L^2 T^{-2}]$ | एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर घूर्णी प्रभाव। | | स्थितिज ऊर्जा (U) | $U = -\vec{p} \cdot \vec{E}$ या $U = -pE \cos\theta$ | जूल (J) | $[M^1 L^2 T^{-2}]$ | एकसमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव की ऊर्जा। | | विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$) | $\Phi_E = \int \vec{E} \cdot d\vec{A}$ | Nm$^2$/C या Vm | $[\text{M}^1 \text{L}^3 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ | किसी सतह से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या का माप। | | गॉस का नियम | $\Phi_E = \oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q_{अंदर}}{\epsilon_0}$ | Nm$^2$/C या Vm | $[\text{M}^1 \text{L}^3 \text{T}^{-3} \text{A}^{-1}]$ | किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स और परिबद्ध आवेश का संबंध। | | रेखीय आवेश घनत्व ($\lambda$) | $\lambda = dQ/dL$ | C/m | $[A^1 T^1 L^{-1}]$ | प्रति इकाई लंबाई आवेश। | | पृष्ठीय आवेश घनत्व ($\sigma$) | $\sigma = dQ/dA$ | C/m$^2$ | $[A^1 T^1 L^{-2}]$ | प्रति इकाई क्षेत्रफल आवेश। | | आयतन आवेश घनत्व ($\rho$) | $\rho = dQ/dV$ | C/m$^3$ | $[A^1 T^1 L^{-3}]$ | प्रति इकाई आयतन आवेश। |