इतिहास (भारत और समकालीन विश्व-II) 1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय राष्ट्रवाद: एक राष्ट्र के प्रति निष्ठा और उसके प्रति प्रेम की भावना। फ्रांसीसी क्रांति (1789): राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति। नेपोलियन संहिता (1804): जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त, संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया। वियना कांग्रेस (1815): नेपोलियन द्वारा किए गए परिवर्तनों को समाप्त करने का प्रयास। इटली का एकीकरण: मेजिनी, कावूर, गैरीबाल्डी के प्रयास। जर्मनी का एकीकरण: बिस्मार्क की "रक्त और लौह" नीति। 2. इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन फ्रांसीसी उपनिवेश: वियतनाम, लाओस, कंबोडिया। हो ची मिन्ह: वियतनामी राष्ट्रवाद के प्रमुख नेता। वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी: 1930 में स्थापित। डिएन बिएन फू का युद्ध (1954): फ्रांसीसी हार, वियतनाम का विभाजन। अमेरिका-वियतनाम युद्ध: 1975 में वियतनाम का एकीकरण। 3. भारत में राष्ट्रवाद प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: करों में वृद्धि, जबरन भर्ती, महंगाई। गांधीजी का आगमन: 1915 में दक्षिण अफ्रीका से वापसी। सत्याग्रह: चंपारण (1917), खेड़ा (1918), अहमदाबाद (1918)। रॉलेट एक्ट (1919): बिना मुकदमे के गिरफ्तारी। जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): जनरल डायर। खिलाफत आंदोलन: तुर्की के खलीफा के समर्थन में। असहयोग आंदोलन (1920-22): गांधीजी द्वारा चलाया गया। चौरी-चौरा घटना के बाद वापस लिया गया। साइमन कमीशन (1928): भारत में संवैधानिक व्यवस्था की जांच हेतु। सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी मार्च (नमक कानून तोड़ना)। गांधी-इरविन समझौता (1931)। भारत छोड़ो आंदोलन (1942): "करो या मरो" का नारा। 4. भूमंडलीकृत विश्व का बनना सिल्क रूट: एशिया को यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने वाला व्यापार मार्ग। आलू, मक्का, टमाटर: अमेरिका से यूरोप पहुँचे। औद्योगिक क्रांति: 18वीं सदी के अंत में ब्रिटेन में। गिरमिटिया मजदूर: उपनिवेशों में काम करने के लिए भारतीय मजदूरों को ले जाया गया। ब्रेटन वुड्स समझौता: IMF और विश्व बैंक की स्थापना। 5. औद्योगिकीकरण का युग जेम्स वॉट: भाप इंजन में सुधार। स्पिनिंग जेनी: जेम्स हरग्रीव्स द्वारा। फ्लाई शटल: जॉन के द्वारा। प्रारंभिक उद्यमी: द्वारकानाथ टैगोर, जमशेदजी टाटा, सेठ हुकुमचंद। फैक्ट्री व्यवस्था: उत्पादन में वृद्धि, श्रमिकों का शोषण। 6. काम, आराम और जीवन शहरीकरण: शहरों का विकास। लंदन: 18वीं सदी में सबसे बड़ा शहर। आवास की समस्या: गंदी बस्तियों का उदय। टैनेमेंट: बहुमंजिला अपार्टमेंट, अक्सर खराब हालत में। 7. मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया चीन: मुद्रण की सबसे पुरानी तकनीक (ब्लॉक प्रिंटिंग)। योहान गुटेनबर्ग: जर्मनी में प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार (1440 के दशक)। मुद्रण क्रांति: पुस्तकों की उपलब्धता में वृद्धि, ज्ञान का प्रसार। मार्टिन लूथर: प्रोटेस्टेंट धर्म सुधार आंदोलन में मुद्रण की भूमिका। वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878): भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों पर प्रतिबंध। 8. उपन्यास, समाज और इतिहास उपन्यास: 18वीं सदी में लोकप्रिय हुआ। समाज पर प्रभाव: नए विचारों का प्रसार, सामाजिक परिवर्तनों पर चर्चा। भारतीय उपन्यास: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का 'आनंदमठ', प्रेमचंद की 'गोदान'। भूगोल (समकालीन भारत-II) 1. संसाधन और विकास संसाधन: वे सभी वस्तुएँ जो मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं। संसाधनों का वर्गीकरण: उत्पत्ति (जैव, अजैव), समाप्यता (नवीकरणीय, अनवीकरणीय), स्वामित्व (व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय), विकास की अवस्था (संभावी, विकसित, भंडार, संचित कोष)। मृदा संसाधन: जलोढ़, काली, लाल और पीली, लेटेराइट, मरुस्थलीय, वन मृदा। मृदा अपरदन: मृदा का कटाव। संसाधन नियोजन: संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग। 2. वन और वन्यजीव संसाधन जैव विविधता: पृथ्वी पर जीवन की विभिन्नता। भारत में वनस्पतिजात और प्राणीजात: समृद्ध जैव विविधता। संरक्षण के उपाय: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र। चिपको आंदोलन: पेड़ों की कटाई रोकने के लिए। 3. जल संसाधन जल दुर्लभता: जल की कमी। बहुउद्देशीय परियोजनाएँ: बाँध (सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण)। वर्षा जल संग्रहण: जल संरक्षण का पारंपरिक तरीका। 4. कृषि कृषि के प्रकार: प्रारंभिक जीविका निर्वाह, गहन जीविका, वाणिज्यिक। फसलें: चावल, गेहूँ, मक्का, बाजरा, दलहन, तिलहन। रोपण कृषि: चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना। श्वेत क्रांति: दुग्ध उत्पादन। हरित क्रांति: खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि। 5. खनिज और ऊर्जा संसाधन खनिज: निश्चित रासायनिक संरचना वाले प्राकृतिक पदार्थ। खनिज का वर्गीकरण: धात्विक (लौह, अलौह), अधात्विक (अभ्रक, चूना पत्थर), ऊर्जा खनिज (कोयला, पेट्रोलियम)। ऊर्जा संसाधन: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत, परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा। खनिजों का संरक्षण: सतत उपयोग। 6. विनिर्माण उद्योग विनिर्माण: कच्चे माल को मूल्यवान उत्पादों में बदलना। उद्योगों का वर्गीकरण: कृषि-आधारित (सूती वस्त्र, चीनी), खनिज-आधारित (लौह-इस्पात, सीमेंट)। औद्योगिक प्रदूषण: वायु, जल, भूमि, ध्वनि प्रदूषण। पर्यावरणीय ह्रास पर नियंत्रण: प्रदूषण नियंत्रण उपाय। 7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ परिवहन: सड़क, रेल, पाइपलाइन, जल, वायु। संचार: डाक, तार, टेलीफोन, इंटरनेट। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: देशों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान। पर्यटन: एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि। राजनीति विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति-II) 1. सत्ता की साझेदारी सत्ता की साझेदारी: सरकार के विभिन्न अंगों और स्तरों के बीच शक्ति का बंटवारा। बेल्जियम और श्रीलंका का उदाहरण: बेल्जियम ने सत्ता की साझेदारी अपनाई, श्रीलंका में गृहयुद्ध। सत्ता की साझेदारी के रूप: क्षैतिज वितरण: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका। ऊर्ध्वाधर वितरण: केंद्र, राज्य, स्थानीय सरकार। विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच। राजनीतिक दलों, दबाव समूहों के बीच। 2. संघवाद संघवाद: सरकार का वह स्वरूप जिसमें सत्ता केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विभाजित होती है। एकात्मक शासन: शासन का एक ही स्तर, केंद्र शक्तिशाली। भारत में संघवाद: तीन-स्तरीय सरकार (केंद्र, राज्य, स्थानीय)। विषयों का बंटवारा: संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची। पंचायती राज: ग्रामीण स्थानीय सरकार। नगरपालिकाएँ: शहरी स्थानीय सरकार। 3. लोकतंत्र और विविधता सामाजिक विविधता: जाति, धर्म, लिंग, भाषा के आधार पर। सामाजिक विभाजन: जब कुछ सामाजिक अंतर दूसरों से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। लोकतंत्र में विविधता का सम्मान: विभिन्न समूहों को प्रतिनिधित्व। मेक्सिको ओलंपिक का उदाहरण: टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस का विरोध। 4. जाति, धर्म और लैंगिक मसले लैंगिक समानता: महिला और पुरुष के बीच समानता। पितृसत्ता: पुरुषों का वर्चस्व। धर्मनिरपेक्ष राज्य: कोई राजकीय धर्म नहीं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। जाति व्यवस्था: भारत में सामाजिक स्तरीकरण का एक रूप। दलित: निचली समझी जाने वाली जातियाँ। 5. जन संघर्ष और आंदोलन लोकतंत्र में संघर्ष: आवश्यक। नेपाल में लोकतंत्र के लिए आंदोलन: राजशाही से लोकतंत्र की ओर। बोलीविया में जल युद्ध: पानी के निजीकरण के खिलाफ। दबाव समूह: विशेष हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन। आंदोलन: संगठित सामूहिक कार्रवाई। 6. राजनीतिक दल राजनीतिक दल: लोगों का एक समूह जो चुनाव लड़ने और सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से संगठित होता है। दलों के कार्य: चुनाव लड़ना, सरकार बनाना, नीतियों को आकार देना, विपक्ष की भूमिका निभाना। दलीय प्रणाली: एक-दलीय, दो-दलीय, बहु-दलीय। राष्ट्रीय दल: पूरे देश में प्रभाव। क्षेत्रीय दल: किसी विशेष क्षेत्र में प्रभाव। दलों के सामने चुनौतियाँ: आंतरिक लोकतंत्र की कमी, वंशवाद, धन और बाहुबल का प्रयोग। दलों में सुधार: दलबदल विरोधी कानून, शपथ पत्र, चुनाव आयोग के निर्देश। 7. लोकतंत्र के परिणाम लोकतंत्र: नागरिकों को समानता, गरिमा और स्वतंत्रता प्रदान करता है। जवाबदेह, उत्तरदायी और वैध सरकार: लोकतंत्र की विशेषताएँ। आर्थिक समृद्धि और विकास: लोकतंत्र हमेशा बेहतर नहीं होता। असमानता और गरीबी में कमी: लोकतंत्र में चुनौतियाँ। सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य: लोकतंत्र में संभव। गरिमा और स्वतंत्रता: लोकतंत्र का आधार। 8. लोकतंत्र की चुनौतियाँ बुनियादी चुनौती: लोकतंत्र को मजबूत करना। विस्तार की चुनौती: लोकतंत्र को सभी क्षेत्रों और स्तरों तक फैलाना। लोकतंत्र को मजबूत करने की चुनौती: संस्थानों को मजबूत करना। चुनौतियों का सामना: लोकतांत्रिक सुधारों से। अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) 1. विकास विकास: प्रगति, बेहतरी। राष्ट्रीय आय: देश की कुल आय। प्रति व्यक्ति आय: कुल आय / कुल जनसंख्या। मानव विकास सूचकांक (HDI): UNDP द्वारा जारी, जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय के आधार पर। सार्वजनिक सुविधाएँ: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता। सतत विकास: पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति, भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को संरक्षित करना। 2. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक: कृषि, वानिकी, खनन। द्वितीयक क्षेत्रक: विनिर्माण, उद्योग। तृतीयक क्षेत्रक (सेवा क्षेत्रक): परिवहन, संचार, बैंकिंग, शिक्षा। सकल घरेलू उत्पाद (GDP): एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य। संगठित क्षेत्रक: निश्चित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा लाभ। असंगठित क्षेत्रक: अनियमित रोजगार, कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं। मनरेगा (MGNREGA 2005): ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी। 3. मुद्रा और साख मुद्रा: विनिमय का माध्यम। वस्तु विनिमय प्रणाली: वस्तुओं का वस्तुओं से सीधा आदान-प्रदान। बैंक: जमा स्वीकार करते हैं और ऋण देते हैं। ऋण: उधार ली गई राशि। ऋण की शर्तें: ब्याज दर, संपार्श्विक (गिरवी), दस्तावेजीकरण, भुगतान का तरीका। औपचारिक क्षेत्रक के ऋण: बैंक, सहकारी समितियाँ (कम ब्याज दर)। अनौपचारिक क्षेत्रक के ऋण: साहूकार, व्यापारी (उच्च ब्याज दर)। स्वयं सहायता समूह (SHG): ग्रामीण गरीब महिलाओं के छोटे समूह। 4. वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्वीकरण: विश्व अर्थव्यवस्था का एकीकरण। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs): एक से अधिक देशों में उत्पादन का नियंत्रण। विदेशी निवेश: MNCs द्वारा किया गया निवेश। उदारीकरण: व्यापार बाधाओं को हटाना। विश्व व्यापार संगठन (WTO): अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है। वैश्वीकरण के प्रभाव: उपभोक्ता को अधिक विकल्प, नए रोजगार, लेकिन छोटे उत्पादकों को नुकसान। निष्पक्ष वैश्वीकरण: सभी के लिए लाभ सुनिश्चित करना। 5. उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ता: वह व्यक्ति जो वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग करता है। उपभोक्ता अधिकार: सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, निवारण का अधिकार, उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार। कोबरा (COPRA - उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986): उपभोक्ता अदालतों की स्थापना। ISI, Agmark, Hallmark: उत्पादों की गुणवत्ता के चिह्न। आपदा प्रबंधन 1. सुनामी सुनामी: समुद्र के भीतर भूकंप या ज्वालामुखी से उत्पन्न विशाल लहरें। बचाव के उपाय: तटीय क्षेत्रों से दूर रहना, चेतावनी पर ध्यान देना। 2. बाढ़ और सूखा बाढ़: अत्यधिक वर्षा से जलभराव। सूखा: वर्षा की कमी से जल का अभाव। बचाव के उपाय: बाढ़ नियंत्रण, जल संग्रहण, वृक्षारोपण। 3. भूकंप भूकंप: पृथ्वी की सतह का कंपन। भूकंप रोधी इमारतें: सुरक्षा के लिए। बचाव: खुले स्थान पर जाना, मेज के नीचे छुपना। 4. आग आग के प्रकार: बिजली, गैस, रासायनिक। अग्निशमन: आग बुझाने के तरीके। सुरक्षा: आग बुझाने वाले यंत्र, आपातकालीन निकास। 5. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन प्राथमिक उपचार: चोट लगने पर तत्काल सहायता। आपदा किट: आवश्यक सामग्री का संग्रह। समुदाय की भूमिका: आपदा के दौरान सहयोग। 6. आपदा और सह-अस्तित्व आपदा जोखिम न्यूनीकरण: आपदाओं के प्रभावों को कम करना। सामुदायिक भागीदारी: आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण। अनुकूलन: आपदाओं के साथ जीना सीखना।