यूनिट 1: यांत्रिकी 1. भौतिक मात्रक और मापन मूल मात्रक: लंबाई (मीटर, m), द्रव्यमान (किलोग्राम, kg), समय (सेकंड, s), विद्युत धारा (एम्पीयर, A), तापमान (केल्विन, K), पदार्थ की मात्रा (मोल, mol), ज्योति तीव्रता (कैंडेला, cd). विमीय सूत्र: किसी भौतिक राशि को मूल मात्रकों की घातों के रूप में व्यक्त करना. उदाहरण: बल $F = ma = [M^1 L^1 T^{-2}]$. मापन में त्रुटियां: यादृच्छिक त्रुटि: अनियमित, अनिश्चित कारणों से. व्यवस्थित त्रुटि: उपकरण की कमी, विधि की कमी, व्यक्तिगत त्रुटि. पूर्ण त्रुटि: $\Delta A = |A_{true} - A_{measured}|$. सापेक्ष त्रुटि: $\frac{\Delta A}{A_{true}}$. प्रतिशत त्रुटि: $\frac{\Delta A}{A_{true}} \times 100\%$. 2. सदिश गणित और सदिश विश्लेषण सदिश: ऐसी राशियाँ जिनमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं (उदाहरण: बल, वेग). अदिश: ऐसी राशियाँ जिनमें केवल परिमाण होता है (उदाहरण: द्रव्यमान, दूरी). सदिशों का योग (त्रिभुज/समांतर चतुर्भुज नियम): यदि $\vec{A}$ और $\vec{B}$ दो सदिश हैं, तो परिणामी सदिश $\vec{R} = \vec{A} + \vec{B}$ का परिमाण $R = \sqrt{A^2 + B^2 + 2AB \cos \theta}$ होता है. अदिश गुणनफल (डॉट प्रोडक्ट): $\vec{A} \cdot \vec{B} = AB \cos \theta$. परिणाम एक अदिश राशि होती है. सदिश गुणनफल (क्रॉस प्रोडक्ट): $\vec{A} \times \vec{B} = AB \sin \theta \hat{n}$. परिणाम एक सदिश राशि होती है, जिसकी दिशा $\vec{A}$ और $\vec{B}$ दोनों के लंबवत होती है (दाहिने हाथ का नियम). 3. गति का सिद्धांत गति के प्रकार: सरल रेखीय गति: एक सीधी रेखा में गति. वक्र रेखीय गति: एक वक्र पथ पर गति. न्यूटन के गति के नियम: पहला नियम (जड़त्व का नियम): जब तक कोई बाहरी बल न लगे, वस्तु अपनी विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है. दूसरा नियम: किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बाहरी बल के समानुपाती होती है और बल की दिशा में होती है. $F = \frac{dp}{dt} = ma$. तीसरा नियम: प्रत्येक क्रिया की हमेशा एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है. गति के समीकरण (एकसमान त्वरण के लिए): $v = u + at$ $s = ut + \frac{1}{2} at^2$ $v^2 = u^2 + 2as$ जहां $u$ प्रारंभिक वेग, $v$ अंतिम वेग, $a$ त्वरण, $t$ समय, $s$ विस्थापन है. 4. बल, ऊर्जा और शक्ति बल: वह कारक जो किसी वस्तु की अवस्था में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है. मात्रक: न्यूटन (N). कार्य: बल और बल की दिशा में विस्थापन का अदिश गुणनफल. $W = \vec{F} \cdot \vec{d} = Fd \cos \theta$. मात्रक: जूल (J). ऊर्जा: कार्य करने की क्षमता. गतिज ऊर्जा: गति के कारण ऊर्जा. $K = \frac{1}{2} mv^2$. स्थितिज ऊर्जा: स्थिति या विन्यास के कारण ऊर्जा. गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा $U = mgh$. ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है. शक्ति: कार्य करने की दर. $P = \frac{W}{t} = \vec{F} \cdot \vec{v}$. मात्रक: वाट (W). 5. संवेग और संवेग संरक्षण रेखीय संवेग: द्रव्यमान और वेग का गुणनफल. $\vec{p} = m\vec{v}$. मात्रक: kg m/s. रेखीय संवेग संरक्षण का नियम: यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल कार्य नहीं करता है, तो निकाय का कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है. $\sum \vec{p}_{initial} = \sum \vec{p}_{final}$. कोणीय संवेग: जड़त्व आघूर्ण और कोणीय वेग का गुणनफल. $\vec{L} = I\vec{\omega}$. बिंदु द्रव्यमान के लिए $\vec{L} = \vec{r} \times \vec{p}$. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम: यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण कार्य नहीं करता है, तो निकाय का कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है. 6. घूर्णन गति जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia, $I$): घूर्णन गति में द्रव्यमान के समान भूमिका निभाता है. $I = \sum mr^2$. विभिन्न आकृतियों के लिए भिन्न होता है. घूर्णन गतिज ऊर्जा: $K_{rot} = \frac{1}{2} I\omega^2$. बल आघूर्ण (Torque, $\vec{\tau}$): बल का घूर्णी प्रभाव. $\vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F}$. न्यूटन के दूसरे नियम का घूर्णी समतुल्य: $\tau = I\alpha$. समांतर अक्ष प्रमेय: $I = I_{cm} + Md^2$. लंबवत अक्ष प्रमेय (केवल समतल पटल के लिए): $I_z = I_x + I_y$. 7. गुरुत्वाकर्षण के नियम और केप्लर के नियम न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम: ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है. $F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}$. ($G$ सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक). गुरुत्वाकर्षण विभव: अनंत से इकाई द्रव्यमान को किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य. $V = -\frac{GM}{r}$. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता: इकाई द्रव्यमान पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल. $E = -\frac{GM}{r^2}$. केप्लर के ग्रहीय गति के नियम: पहला नियम (कक्षाओं का नियम): सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं, और सूर्य इन दीर्घवृत्तों के एक फोकस पर स्थित होता है. दूसरा नियम (क्षेत्रफलों का नियम): ग्रह को सूर्य से जोड़ने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है. (कोणीय संवेग संरक्षण का परिणाम). तीसरा नियम (आवर्तकाल का नियम): किसी भी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष की तीसरी घात के समानुपाती होता है. $T^2 \propto a^3$. यूनिट 2: पदार्थ के गुण 1. प्रतिबल और विकृति प्रतिबल (Stress, $\sigma$): प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला आंतरिक प्रत्यानयन बल. $\sigma = \frac{F}{A}$. मात्रक: Pa (पास्कल) या N/m$^2$. अभिलंब प्रतिबल: सतह के लंबवत. स्पर्शरेखीय/अपरूपण प्रतिबल: सतह के समानांतर. विकृति (Strain, $\epsilon$): वस्तु के आयाम में परिवर्तन और मूल आयाम का अनुपात. $\epsilon = \frac{\Delta L}{L_0}$ (अनुदैर्ध्य विकृति). यह एक विमाहीन राशि है. अनुदैर्ध्य विकृति: लंबाई में परिवर्तन. आयतन विकृति: आयतन में परिवर्तन. अपरूपण विकृति: आकार में परिवर्तन. 2. हुक का नियम प्रत्यास्थता की सीमा के भीतर, प्रतिबल विकृति के समानुपाती होता है. $\sigma \propto \epsilon \implies \sigma = E \epsilon$. $E$ को प्रत्यास्थता गुणांक कहा जाता है. 3. यंग, शियर और वॉल्यूम प्रत्यास्थता गुणांक यंग गुणांक (Young's Modulus, $Y$): अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात. $Y = \frac{\text{अभिलंब प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{F/A}{\Delta L/L_0}$. ठोसों की लंबाई में परिवर्तन से संबंधित. अपरूपण गुणांक (Shear Modulus या Modulus of Rigidity, $G$): अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात. $G = \frac{\text{अपरूपण प्रतिबल}}{\text{अपरूपण विकृति}} = \frac{F_t/A}{\phi}$. ठोसों के आकार में परिवर्तन से संबंधित. आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus, $K$): अभिलंब प्रतिबल (या दाब परिवर्तन) और आयतन विकृति का अनुपात. $K = \frac{\text{आयतन प्रतिबल}}{\text{आयतन विकृति}} = \frac{-\Delta P}{\Delta V/V_0}$. द्रवों और गैसों सहित सभी पदार्थों के आयतन में परिवर्तन से संबंधित. पॉइसन अनुपात ($\nu$): पार्श्व विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात. $\nu = -\frac{\text{पार्श्व विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}}$. प्रत्यास्थ स्थिरांकों के बीच संबंध: $Y = 2G(1 + \nu)$ $Y = 3K(1 - 2\nu)$ $Y = \frac{9KG}{3K + G}$ 4. बेलन/किरण का मुड़ना और प्रत्यास्थता माप बंकन आघूर्ण (Bending Moment): किसी बीम को मोड़ने वाला आघूर्ण. जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia, $I$): बंकन के लिए, यह क्रॉस-सेक्शन के आकार पर निर्भर करता है. आयताकार बीम के लिए $I = \frac{bd^3}{12}$ (जहां $b$ चौड़ाई, $d$ गहराई है). कैंटिलीवर का अवसाद: एक सिरे पर कसा हुआ और दूसरे सिरे पर भारित बीम का झुकाव. मुक्त सिरे पर अवसाद $y = \frac{WL^3}{3YI}$. चार-बिंदु बंकन (Four-point bending): बीम के मध्य में अवसाद $y = \frac{WL^3}{48YI}$. यंग गुणांक का निर्धारण: बंकन प्रयोगों से अवसाद को मापकर $Y$ की गणना की जा सकती है. यूनिट 3: दोलन 1. सरल आवर्त गति (SHM) परिभाषा: ऐसी आवर्ती गति जिसमें प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में होता है. $F = -kx$. अवकल समीकरण: $\frac{d^2x}{dt^2} + \omega^2 x = 0$, जहां $\omega = \sqrt{\frac{k}{m}}$ कोणीय आवृत्ति है. हल: $x(t) = A \cos(\omega t + \phi)$, जहां $A$ आयाम, $\phi$ प्रारंभिक कला है. वेग: $v(t) = -A\omega \sin(\omega t + \phi)$. त्वरण: $a(t) = -A\omega^2 \cos(\omega t + \phi) = -\omega^2 x$. आवर्तकाल: $T = \frac{2\pi}{\omega} = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$. आवृत्ति: $f = \frac{1}{T}$. 2. दोलन का समीकरण और ऊर्जा स्थानांतरण गतिज ऊर्जा: $K = \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{2} m A^2 \omega^2 \sin^2(\omega t + \phi)$. स्थितिज ऊर्जा: $U = \frac{1}{2} kx^2 = \frac{1}{2} k A^2 \cos^2(\omega t + \phi)$. कुल यांत्रिक ऊर्जा: $E = K + U = \frac{1}{2} k A^2 = \frac{1}{2} m A^2 \omega^2$. SHM में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है. 3. द्वि-दोलन (Coupled Oscillators) दो या दो से अधिक दोलक जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं. ऊर्जा का एक दोलक से दूसरे में स्थानांतरण होता है. सामान्य विधाएं (Normal Modes): वे विधाएं जिनमें सभी कण एक ही आवृत्ति के साथ सरल आवर्त गति करते हैं. सामान्य विधाओं में दोलक स्वतंत्र रूप से दोलन करते हैं. दो द्रव्यमान-स्प्रिंग प्रणाली के लिए दो सामान्य विधाएं होती हैं: एक सममित (in-phase) और एक असममित (out-of-phase). 4. अवमंदित (Damped) और प्रणोदित (Forced) दोलन अवमंदित दोलन: बाह्य प्रतिरोधक बल (जैसे घर्षण या वायु प्रतिरोध) के कारण दोलन का आयाम समय के साथ घटता जाता है. अवकल समीकरण: $m\frac{d^2x}{dt^2} + b\frac{dx}{dt} + kx = 0$. अवकंदन के प्रकार: अल्प अवमंदित (Underdamped): दोलन होते हैं, लेकिन आयाम घटता जाता है. क्रांतिक अवमंदित (Critically Damped): सबसे तेजी से साम्यवस्था में लौटता है बिना दोलन किए. अति अवमंदित (Overdamped): धीरे-धीरे साम्यवस्था में लौटता है बिना दोलन किए. प्रणोदित दोलन: एक बाहरी आवर्ती बल की उपस्थिति में होने वाले दोलन. अवकल समीकरण: $m\frac{d^2x}{dt^2} + b\frac{dx}{dt} + kx = F_0 \cos(\omega_d t)$. स्थिर अवस्था दोलन: प्रारंभिक क्षणिक दोलनों के बाद, दोलक प्रणोदित बल की आवृत्ति $\omega_d$ के साथ दोलन करता है. 5. अनुनाद (Resonance), गुणवत्ता गुणांक (Q-factor) अनुनाद: जब प्रणोदित बल की आवृत्ति ($\omega_d$) दोलक की प्राकृतिक आवृत्ति ($\omega_0$) के बराबर या उसके करीब होती है, तो दोलनों का आयाम अधिकतम हो जाता है. अनुनाद आवृत्ति: वह आवृत्ति जिस पर आयाम अधिकतम होता है. गुणवत्ता गुणांक (Q-factor): किसी दोलक की ऊर्जा भंडारण क्षमता और ऊर्जा क्षय दर का माप. $Q = 2\pi \frac{\text{प्रति चक्र संग्रहीत औसत ऊर्जा}}{\text{प्रति चक्र ऊर्जा का क्षय}}$. उच्च Q-कारक का अर्थ है कम अवमंदन और तेज अनुनाद. प्रणोदित दोलनों के लिए, $Q = \frac{\omega_0}{\Delta \omega}$, जहां $\Delta \omega$ अनुनाद वक्र की अर्ध-शक्ति चौड़ाई है. यह दोलक की तीक्ष्णता का माप है. यूनिट 4: तरंग गति 1. तरंग समीकरण परिभाषा: ऊर्जा का संचरण बिना पदार्थ के स्थानांतरण के. एक-विमीय तरंग समीकरण: $\frac{\partial^2 y}{\partial x^2} = \frac{1}{v^2} \frac{\partial^2 y}{\partial t^2}$. जहां $y$ विस्थापन, $x$ स्थिति, $t$ समय, $v$ तरंग का वेग है. प्रगामी तरंग का समीकरण: $y(x,t) = A \sin(kx - \omega t + \phi)$. $A$ आयाम, $k$ तरंग संख्या ($k = \frac{2\pi}{\lambda}$), $\omega$ कोणीय आवृत्ति ($\omega = 2\pi f$), $\lambda$ तरंगदैर्ध्य, $f$ आवृत्ति है. तरंग वेग $v = \frac{\omega}{k} = f\lambda$. 2. अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें: माध्यम के कणों का दोलन तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत होता है (उदाहरण: प्रकाश तरंगें, डोरी में तरंगें). अनुदैर्ध्य तरंगें: माध्यम के कणों का दोलन तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर होता है (उदाहरण: ध्वनि तरंगें). डोरी में अनुप्रस्थ तरंग का वेग: $v = \sqrt{\frac{T}{\mu}}$, जहां $T$ डोरी में तनाव, $\mu$ प्रति इकाई लंबाई द्रव्यमान है. तरल पदार्थ में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग (ध्वनि): $v = \sqrt{\frac{K}{\rho}}$, जहां $K$ आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, $\rho$ घनत्व है. ठोसों में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग: $v = \sqrt{\frac{Y}{\rho}}$. 3. तरंगों का अध्यारोपण, परावर्तन, स्थिर तरंगें अध्यारोपण का सिद्धांत: जब दो या दो से अधिक तरंगें एक ही समय में एक ही माध्यम से गुजरती हैं, तो परिणामी विस्थापन प्रत्येक व्यक्तिगत तरंग के विस्थापनों का सदिश योग होता है. परावर्तन: जब एक तरंग एक माध्यम से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है. स्थिर सिरे से परावर्तन: तरंग उलटी हो जाती है (कला में $\pi$ का परिवर्तन). मुक्त सिरे से परावर्तन: तरंग उलटी नहीं होती है (कला में कोई परिवर्तन नहीं). स्थिर तरंगें (Standing Waves): जब दो समान आयाम और आवृत्ति की प्रगामी तरंगें विपरीत दिशाओं में यात्रा करती हुई अध्यारोपित होती हैं, तो स्थिर तरंगें बनती हैं. निष्पंद (Nodes): वे बिंदु जहां विस्थापन हमेशा शून्य होता है. प्रस्पंद (Antinodes): वे बिंदु जहां विस्थापन अधिकतम होता है. स्थिर तरंगों में ऊर्जा का संचरण नहीं होता है. 4. ध्वनिक तरंगें (तरल पदार्थों में तरंगें) ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जो माध्यम में संपीडन और विरलन उत्पन्न करती हैं. तरल पदार्थों में ध्वनि का वेग: $v = \sqrt{\frac{K}{\rho}}$. ध्वनि की तीव्रता: प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई समय में संचरित ऊर्जा. $I = \frac{1}{2} \rho v \omega^2 A^2$. डॉप्लर प्रभाव: स्रोत और श्रोता के बीच सापेक्ष गति के कारण ध्वनि की आभासी आवृत्ति में परिवर्तन. यूनिट 5: बिजली और चुम्बकत्व 1. स्थिर विद्युत और विद्युत क्षेत्र कूलंब का नियम: दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है. $F = k \frac{q_1 q_2}{r^2}$, जहाँ $k = \frac{1}{4\pi\epsilon_0}$. विद्युत क्षेत्र ($\vec{E}$): इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश पर लगने वाला बल. $\vec{E} = \frac{\vec{F}}{q_0}$. बिंदु आवेश के लिए $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r^2}$. विद्युत क्षेत्र रेखाएं: वे काल्पनिक रेखाएं जो विद्युत क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं. विद्युत फ्लक्स ($\Phi_E$): किसी सतह से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या का माप. $\Phi_E = \int \vec{E} \cdot d\vec{A}$. गॉस का नियम: किसी बंद सतह से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस सतह द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का $\frac{1}{\epsilon_0}$ गुना होता है. $\oint \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q_{enc}}{\epsilon_0}$. 2. कुल विद्युत प्रतिबल, विभव और ध्रुवों का प्रभाव विद्युत विभव ($V$): इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य. $V = \frac{W}{q_0}$. बिंदु आवेश के लिए $V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{q}{r}$. विभवांतर: दो बिंदुओं के बीच विभव में अंतर. $\Delta V = V_B - V_A = -\int_A^B \vec{E} \cdot d\vec{l}$. विद्युत क्षेत्र और विभव के बीच संबंध: $\vec{E} = -\nabla V = -\left(\frac{\partial V}{\partial x}\hat{i} + \frac{\partial V}{\partial y}\hat{j} + \frac{\partial V}{\partial z}\hat{k}\right)$. समविभव सतहें: वे सतहें जहां विभव हर जगह समान होता है. विद्युत क्षेत्र रेखाएं समविभव सतहों के लंबवत होती हैं. विद्युत द्विध्रुव: समान परिमाण और विपरीत प्रकृति के दो आवेशों का युग्म जो एक छोटी दूरी पर स्थित होते हैं. द्विध्रुव आघूर्ण ($\vec{p}$): $\vec{p} = q(2\vec{a})$, जहां $2\vec{a}$ आवेशों के बीच की दूरी का सदिश है. विद्युत द्विध्रुव के कारण क्षेत्र/विभव: अक्षीय और विषुवतीय बिंदुओं पर. 3. ध्रुवण, ध्रुवण स्थिरांक, विचलन परावैद्युतांक (Dielectric constant, $K$ या $\epsilon_r$): किसी माध्यम में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और निर्वात में उसकी तीव्रता का अनुपात. $K = \frac{E_{vac}}{E_{med}}$. ध्रुवण (Polarization, $\vec{P}$): जब एक परावैद्युत पदार्थ को बाहरी विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसके अणुओं में द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित हो जाते हैं या संरेखित हो जाते हैं, जिससे पदार्थ के अंदर एक शुद्ध विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न होता है. $\vec{P} = \chi_e \epsilon_0 \vec{E}$, जहां $\chi_e$ विद्युत प्रवृत्ति है. विस्थापन सदिश ($\vec{D}$): $\vec{D} = \epsilon_0 \vec{E} + \vec{P} = \epsilon_0 \epsilon_r \vec{E} = \epsilon \vec{E}$. विचलन (Deviation): यह एक सामान्य शब्द है, संदर्भ के आधार पर इसका अर्थ बदल सकता है. विद्युत चुम्बकीय संदर्भ में, यह किसी पथ से विचलित होने या किसी मात्रा के औसत से विचलित होने को संदर्भित कर सकता है. यूनिट 6: प्रैक्टिकल भौतिकी प्रत्येक प्रयोग के लिए, सिद्धांत, आवश्यक उपकरण, प्रक्रिया, अवलोकन सारणी, गणना और परिणाम को समझना महत्वपूर्ण है. 1. मापन त्रुटि का अध्ययन वर्नियर कैलिपर: लंबाई, व्यास मापने के लिए. न्यूनतम काउंट, शून्य त्रुटि. स्क्रू गेज: पतले तारों का व्यास, शीट की मोटाई मापने के लिए. न्यूनतम काउंट, शून्य त्रुटि. गोलीयमापी (Spherometer): गोलाकार सतहों की वक्रता की त्रिज्या मापने के लिए. न्यूनतम काउंट, शून्य त्रुटि. त्रुटियों का संयोजन: जोड़, घटाव, गुणा, भाग और घात में त्रुटियों का प्रसार. 2. यंग मॉड्यूल, टॉर्शन या सीलिंग विधि से प्रत्यास्थता माप यंग गुणांक का निर्धारण (बंकन विधि): विधि: एक बीम को दो चाकू-धारों पर रखा जाता है और बीच में एक भार लटकाया जाता है. माइक्रोस्कोप या स्फेरोमीटर का उपयोग करके बीम के मध्य में अवसाद मापा जाता है. सूत्र: $Y = \frac{MgL^3}{4bd^3y}$ (आयताकार बीम के लिए) दृढ़ता गुणांक का निर्धारण (टॉर्शन पेंडुलम): विधि: एक डिस्क या बेलन को एक तार से लटकाया जाता है और torsional दोलन कराए जाते हैं. आवर्तकाल मापा जाता है. सूत्र: $T = 2\pi \sqrt{\frac{I}{C}}$, जहाँ $C = \frac{\pi G r^4}{2L}$ (टॉर्शनल दृढ़ता). 3. सरल दोलन, अनुनाद, तरंग प्रयोग सरल लोलक: $T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}}$ का उपयोग करके $g$ का निर्धारण. कम्मान लोलक (Compound Pendulum): आवर्तकाल और दोलन केंद्र का उपयोग करके $g$ का निर्धारण. डोरी का सोनोमीटर: डोरी में अनुप्रस्थ तरंगों का वेग और आवृत्ति का सत्यापन. स्थिर तरंगें और अनुनाद. $f \propto \sqrt{T}$. अनुनाद स्तंभ (Resonance Column): ध्वनि के वेग का निर्धारण. 4. विद्युत उपकरणों का प्रयोग ओम का नियम: $V=IR$ का सत्यापन, प्रतिरोध का निर्धारण. मीटर ब्रिज: अज्ञात प्रतिरोध का निर्धारण, विशिष्ट प्रतिरोध का निर्धारण. पोटेंशियोमीटर: सेल के emf की तुलना, सेल का आंतरिक प्रतिरोध, प्रतिरोध का अंशांकन. गैल्वेनोमीटर का एमीटर/वोल्टमीटर में रूपांतरण: शंट और श्रेणी प्रतिरोधों का उपयोग. 20-25 प्रश्न और उत्तर (न्यूमेरिकल के साथ) यूनिट 1: यांत्रिकी प्रश्न: एक कार 54 km/h की गति से चल रही है. ब्रेक लगाने पर यह 6 सेकंड में रुक जाती है. कार का त्वरण और ब्रेक लगने के बाद तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए. उत्तर: प्रारंभिक वेग $u = 54 \text{ km/h} = 54 \times \frac{5}{18} \text{ m/s} = 15 \text{ m/s}$. अंतिम वेग $v = 0 \text{ m/s}$. समय $t = 6 \text{ s}$. त्वरण $a = \frac{v-u}{t} = \frac{0 - 15}{6} = -2.5 \text{ m/s}^2$. (ऋणात्मक चिह्न मंदन दर्शाता है) तय की गई दूरी $s = ut + \frac{1}{2}at^2 = 15 \times 6 + \frac{1}{2} (-2.5) (6)^2 = 90 - \frac{1}{2} \times 2.5 \times 36 = 90 - 45 = 45 \text{ m}$. प्रश्न: 2 kg द्रव्यमान का एक पिंड 10 m/s के वेग से उत्तर दिशा में गति कर रहा है. 3 kg द्रव्यमान का एक अन्य पिंड 5 m/s के वेग से पूर्व दिशा में गति कर रहा है. टक्कर के बाद दोनों पिंड जुड़ जाते हैं. संयुक्त पिंड का वेग और दिशा ज्ञात कीजिए. उत्तर: संवेग संरक्षण के नियम से: $\vec{p}_{कुल, प्रारंभिक} = \vec{p}_{कुल, अंतिम}$ $m_1 \vec{v}_1 + m_2 \vec{v}_2 = (m_1 + m_2) \vec{V}$ $m_1 = 2 \text{ kg}$, $\vec{v}_1 = 10 \hat{j} \text{ m/s}$ (उत्तर) $m_2 = 3 \text{ kg}$, $\vec{v}_2 = 5 \hat{i} \text{ m/s}$ (पूर्व) $(2)(10 \hat{j}) + (3)(5 \hat{i}) = (2+3) \vec{V}$ $20 \hat{j} + 15 \hat{i} = 5 \vec{V}$ $\vec{V} = (3 \hat{i} + 4 \hat{j}) \text{ m/s}$. परिणामी वेग का परिमाण $V = \sqrt{3^2 + 4^2} = \sqrt{9+16} = \sqrt{25} = 5 \text{ m/s}$. दिशा $\tan \theta = \frac{V_y}{V_x} = \frac{4}{3} \implies \theta = \tan^{-1}\left(\frac{4}{3}\right) \approx 53.1^\circ$ पूर्व से उत्तर की ओर. प्रश्न: 100 g द्रव्यमान और 50 cm त्रिज्या का एक ठोस गोला अपने व्यास के परितः 10 rad/s के कोणीय वेग से घूम रहा है. इसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए. उत्तर: ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण (व्यास के परितः) $I = \frac{2}{5} MR^2$. $M = 100 \text{ g} = 0.1 \text{ kg}$. $R = 50 \text{ cm} = 0.5 \text{ m}$. $I = \frac{2}{5} (0.1)(0.5)^2 = \frac{2}{5} (0.1)(0.25) = \frac{0.05}{5} = 0.01 \text{ kg m}^2$. कोणीय वेग $\omega = 10 \text{ rad/s}$. घूर्णन गतिज ऊर्जा $K_{rot} = \frac{1}{2} I\omega^2 = \frac{1}{2} (0.01)(10)^2 = \frac{1}{2} (0.01)(100) = \frac{1}{2} (1) = 0.5 \text{ J}$. प्रश्न: पृथ्वी की सतह से कितनी ऊंचाई पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण का मान पृथ्वी की सतह पर इसके मान का एक-चौथाई हो जाएगा? (पृथ्वी की त्रिज्या $R$). उत्तर: पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण $g = \frac{GM}{R^2}$. ऊंचाई $h$ पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण $g' = \frac{GM}{(R+h)^2}$. दिया गया है $g' = \frac{g}{4}$. $\frac{GM}{(R+h)^2} = \frac{1}{4} \frac{GM}{R^2}$ $\frac{1}{(R+h)^2} = \frac{1}{4R^2}$ $(R+h)^2 = 4R^2$ $R+h = 2R$ $h = R$. अतः, पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर ऊंचाई पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण एक-चौथाई हो जाएगा. प्रश्न: 5 kg द्रव्यमान का एक पिंड 10 m ऊंचाई से गिराया जाता है. जमीन पर पहुंचने पर उसकी गतिज ऊर्जा क्या होगी? (वायु प्रतिरोध नगण्य मानें, $g = 9.8 \text{ m/s}^2$). उत्तर: ऊर्जा संरक्षण के नियम से, प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा = अंतिम गतिज ऊर्जा. प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा $U = mgh = 5 \times 9.8 \times 10 = 490 \text{ J}$. अतः, जमीन पर पहुंचने पर गतिज ऊर्जा $K = 490 \text{ J}$. यूनिट 2: पदार्थ के गुण प्रश्न: 2 m लंबाई के एक तार का व्यास 0.5 mm है. इस पर 10 kg का भार लटकाने पर इसकी लंबाई में 0.2 mm की वृद्धि होती है. तार के पदार्थ का यंग गुणांक ज्ञात कीजिए. ($g = 9.8 \text{ m/s}^2$). उत्तर: लंबाई $L_0 = 2 \text{ m}$. व्यास $D = 0.5 \text{ mm} = 0.5 \times 10^{-3} \text{ m}$. त्रिज्या $r = D/2 = 0.25 \times 10^{-3} \text{ m}$. क्षेत्रफल $A = \pi r^2 = \pi (0.25 \times 10^{-3})^2 = 0.0625\pi \times 10^{-6} \text{ m}^2$. भार $F = mg = 10 \times 9.8 = 98 \text{ N}$. लंबाई में वृद्धि $\Delta L = 0.2 \text{ mm} = 0.2 \times 10^{-3} \text{ m}$. यंग गुणांक $Y = \frac{F/A}{\Delta L/L_0} = \frac{FL_0}{A\Delta L}$. $Y = \frac{98 \times 2}{(0.0625\pi \times 10^{-6}) \times (0.2 \times 10^{-3})} = \frac{196}{0.03925 \times 10^{-9}} \approx 4.99 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$. प्रश्न: एक तरल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक $2 \times 10^9 \text{ N/m}^2$ है. यदि तरल पर $10^5 \text{ N/m}^2$ का दाब लगाया जाता है, तो उसके आयतन में भिन्नात्मक कमी ज्ञात कीजिए. उत्तर: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक $K = 2 \times 10^9 \text{ N/m}^2$. दाब परिवर्तन $\Delta P = 10^5 \text{ N/m}^2$. $K = \frac{-\Delta P}{\Delta V/V_0} \implies \frac{\Delta V}{V_0} = -\frac{\Delta P}{K}$. भिन्नात्मक कमी (आयतन विकृति) $|\frac{\Delta V}{V_0}| = \frac{10^5}{2 \times 10^9} = 0.5 \times 10^{-4}$. प्रश्न: एक पदार्थ का यंग गुणांक $2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$ और पॉइसन अनुपात 0.2 है. इसका दृढ़ता गुणांक ज्ञात कीजिए. उत्तर: यंग गुणांक $Y = 2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$. पॉइसन अनुपात $\nu = 0.2$. संबंध $Y = 2G(1 + \nu)$ का उपयोग करते हुए: $G = \frac{Y}{2(1 + \nu)} = \frac{2 \times 10^{11}}{2(1 + 0.2)} = \frac{2 \times 10^{11}}{2 \times 1.2} = \frac{2 \times 10^{11}}{2.4} \approx 0.833 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$. प्रश्न: 2 m लंबाई, 4 cm चौड़ाई और 1 cm गहराई की एक कैंटिलीवर बीम के मुक्त सिरे पर 5 kg का भार लटकाया गया है. यदि पदार्थ का यंग गुणांक $2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$ है, तो मुक्त सिरे पर अवसाद ज्ञात कीजिए. ($g = 9.8 \text{ m/s}^2$). उत्तर: लंबाई $L = 2 \text{ m}$. चौड़ाई $b = 4 \text{ cm} = 0.04 \text{ m}$. गहराई $d = 1 \text{ cm} = 0.01 \text{ m}$. भार $W = mg = 5 \times 9.8 = 49 \text{ N}$. यंग गुणांक $Y = 2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$. जड़त्व आघूर्ण $I = \frac{bd^3}{12} = \frac{0.04 \times (0.01)^3}{12} = \frac{0.04 \times 10^{-6}}{12} = \frac{1}{3} \times 10^{-8} \text{ m}^4$. अवसाद $y = \frac{WL^3}{3YI} = \frac{49 \times (2)^3}{3 \times (2 \times 10^{11}) \times (\frac{1}{3} \times 10^{-8})} = \frac{49 \times 8}{2 \times 10^3} = \frac{392}{2000} = 0.196 \text{ m}$. प्रश्न: एक ठोस तार जिसकी लंबाई 1 m और त्रिज्या 1 mm है, पर 100 N का तनाव लगाया जाता है. यदि तार के पदार्थ का यंग गुणांक $2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$ है, तो तार में संग्रहीत प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए. उत्तर: $L_0 = 1 \text{ m}$, $r = 1 \text{ mm} = 10^{-3} \text{ m}$. $A = \pi r^2 = \pi (10^{-3})^2 = \pi \times 10^{-6} \text{ m}^2$. $F = 100 \text{ N}$, $Y = 2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2$. पहले लंबाई में वृद्धि $\Delta L$ ज्ञात करें: $\Delta L = \frac{FL_0}{AY} = \frac{100 \times 1}{(\pi \times 10^{-6}) \times (2 \times 10^{11})} = \frac{100}{2\pi \times 10^5} = \frac{50}{\pi} \times 10^{-5} \text{ m}$. संग्रहीत प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा $U = \frac{1}{2} F \Delta L = \frac{1}{2} \times 100 \times \frac{50}{\pi} \times 10^{-5} = 2500 \times 10^{-5} / \pi = \frac{0.025}{\pi} \approx 0.00796 \text{ J}$. यूनिट 3: दोलन प्रश्न: एक स्प्रिंग से जुड़ा 0.5 kg द्रव्यमान का एक पिंड सरल आवर्त गति कर रहा है. यदि स्प्रिंग नियतांक 20 N/m है, तो दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए. उत्तर: द्रव्यमान $m = 0.5 \text{ kg}$. स्प्रिंग नियतांक $k = 20 \text{ N/m}$. आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} = 2\pi \sqrt{\frac{0.5}{20}} = 2\pi \sqrt{\frac{1}{40}} = 2\pi \frac{1}{\sqrt{40}} = 2\pi \frac{1}{2\sqrt{10}} = \frac{\pi}{\sqrt{10}} \text{ s}$. $T \approx \frac{3.1415}{3.162} \approx 0.993 \text{ s}$. प्रश्न: एक सरल आवर्त गति में, आयाम 5 cm और आवृत्ति 2 Hz है. पिंड का अधिकतम वेग और अधिकतम त्वरण ज्ञात कीजिए. उत्तर: आयाम $A = 5 \text{ cm} = 0.05 \text{ m}$. आवृत्ति $f = 2 \text{ Hz}$. कोणीय आवृत्ति $\omega = 2\pi f = 2\pi (2) = 4\pi \text{ rad/s}$. अधिकतम वेग $v_{max} = A\omega = 0.05 \times 4\pi = 0.2\pi \text{ m/s} \approx 0.628 \text{ m/s}$. अधिकतम त्वरण $a_{max} = A\omega^2 = 0.05 \times (4\pi)^2 = 0.05 \times 16\pi^2 = 0.8\pi^2 \text{ m/s}^2 \approx 7.89 \text{ m/s}^2$. प्रश्न: एक अवमंदित दोलक का द्रव्यमान 1 kg, स्प्रिंग नियतांक 100 N/m और अवमंदन गुणांक $b = 2 \text{ N s/m}$ है. क्या यह दोलक अल्प-अवमंदित, क्रांतिक-अवमंदित या अति-अवमंदित है? उत्तर: द्रव्यमान $m = 1 \text{ kg}$. स्प्रिंग नियतांक $k = 100 \text{ N/m}$. अवकंदन गुणांक $b = 2 \text{ N s/m}$. क्रांतिक अवमंदन गुणांक $b_c = 2\sqrt{mk} = 2\sqrt{1 \times 100} = 2\sqrt{100} = 2 \times 10 = 20 \text{ N s/m}$. चूंकि $b प्रश्न: एक प्रणोदित दोलक की प्राकृतिक आवृत्ति 10 Hz है. यदि प्रणोदित बल की आवृत्ति भी 10 Hz है, तो दोलक की किस घटना का अनुभव होगा? इस घटना का एक उदाहरण दीजिए. उत्तर: जब प्रणोदित बल की आवृत्ति दोलक की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर होती है, तो दोलक अनुनाद का अनुभव करेगा. इस स्थिति में, दोलनों का आयाम अधिकतम हो जाता है. उदाहरण: एक झूले को सही समय पर धकेलने पर उसका आयाम बढ़ जाता है. रेडियो ट्यूनिंग. प्रश्न: एक दोलक का गुणवत्ता गुणांक (Q-factor) 50 है और उसकी प्राकृतिक आवृत्ति 500 Hz है. उसकी बैंडविड्थ (अनुनाद वक्र की अर्ध-शक्ति चौड़ाई) ज्ञात कीजिए. उत्तर: गुणवत्ता गुणांक $Q = 50$. प्राकृतिक आवृत्ति $f_0 = 500 \text{ Hz}$. संबंध $Q = \frac{f_0}{\Delta f}$ का उपयोग करते हुए, जहां $\Delta f$ बैंडविड्थ है. $\Delta f = \frac{f_0}{Q} = \frac{500}{50} = 10 \text{ Hz}$. यूनिट 4: तरंग गति प्रश्न: एक डोरी में अनुप्रस्थ तरंग का वेग 20 m/s है. यदि डोरी में तनाव 50 N है, तो डोरी के प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए. उत्तर: तरंग वेग $v = 20 \text{ m/s}$. तनाव $T = 50 \text{ N}$. सूत्र $v = \sqrt{\frac{T}{\mu}}$ का उपयोग करते हुए: $v^2 = \frac{T}{\mu} \implies \mu = \frac{T}{v^2} = \frac{50}{(20)^2} = \frac{50}{400} = \frac{1}{8} = 0.125 \text{ kg/m}$. प्रश्न: एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 200 Hz है और वायु में इसका वेग 340 m/s है. इस ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए. उत्तर: आवृत्ति $f = 200 \text{ Hz}$. वेग $v = 340 \text{ m/s}$. संबंध $v = f\lambda$ का उपयोग करते हुए: $\lambda = \frac{v}{f} = \frac{340}{200} = 1.7 \text{ m}$. प्रश्न: दो तरंगों के समीकरण $y_1 = 5 \sin(2\pi t - 3x)$ और $y_2 = 5 \sin(2\pi t - 3x + \pi)$ हैं. इनके अध्यारोपण से परिणामी तरंग का आयाम ज्ञात कीजिए. उत्तर: दोनों तरंगों का आयाम $A_1 = A_2 = 5$. दोनों तरंगों के बीच कला अंतर $\phi = \pi$. परिणामी तरंग का आयाम $A = \sqrt{A_1^2 + A_2^2 + 2A_1 A_2 \cos \phi}$. $A = \sqrt{5^2 + 5^2 + 2 \times 5 \times 5 \cos \pi} = \sqrt{25 + 25 + 50(-1)} = \sqrt{50 - 50} = 0$. चूंकि कला अंतर $\pi$ है, तरंगें एक दूसरे को पूरी तरह से रद्द कर देंगी (विनाशी व्यतिकरण), जिससे परिणामी आयाम शून्य होगा. प्रश्न: एक खुले ऑर्गन पाइप की लंबाई 0.5 m है. इसमें उत्पन्न होने वाली मूल आवृत्ति और पहले अधिस्वरक की आवृत्ति ज्ञात कीजिए. (वायु में ध्वनि का वेग = 340 m/s). उत्तर: खुले ऑर्गन पाइप के लिए मूल आवृत्ति $f_1 = \frac{v}{2L}$. $L = 0.5 \text{ m}$, $v = 340 \text{ m/s}$. $f_1 = \frac{340}{2 \times 0.5} = \frac{340}{1} = 340 \text{ Hz}$. पहले अधिस्वरक की आवृत्ति (दूसरा हार्मोनिक) $f_2 = 2f_1 = 2 \times 340 = 680 \text{ Hz}$. प्रश्न: एक ट्रेन 20 m/s की गति से एक स्थिर श्रोता की ओर आ रही है. यदि ट्रेन की सीटी की आवृत्ति 400 Hz है और ध्वनि का वेग 340 m/s है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति ज्ञात कीजिए. उत्तर: डॉप्लर प्रभाव के सूत्र से (जब स्रोत श्रोता की ओर आ रहा हो): $f' = f \left(\frac{v}{v - v_s}\right)$. ट्रेन की सीटी की आवृत्ति $f = 400 \text{ Hz}$. ध्वनि का वेग $v = 340 \text{ m/s}$. स्रोत का वेग $v_s = 20 \text{ m/s}$. $f' = 400 \left(\frac{340}{340 - 20}\right) = 400 \left(\frac{340}{320}\right) = 400 \times \frac{17}{16} = 25 \times 17 = 425 \text{ Hz}$. यूनिट 5: बिजली और चुम्बकत्व प्रश्न: 2 C और -4 C के दो बिंदु आवेश 2 m की दूरी पर रखे गए हैं. उनके बीच लगने वाले बल की गणना करें. ($k = 9 \times 10^9 \text{ N m}^2/\text{C}^2$). उत्तर: $q_1 = 2 \text{ C}$, $q_2 = -4 \text{ C}$. $r = 2 \text{ m}$. कूलंब के नियम से $F = k \frac{|q_1 q_2|}{r^2} = (9 \times 10^9) \frac{|(2)(-4)|}{(2)^2} = (9 \times 10^9) \frac{8}{4} = 9 \times 10^9 \times 2 = 1.8 \times 10^{10} \text{ N}$. बल आकर्षणात्मक होगा क्योंकि आवेश विपरीत प्रकृति के हैं. प्रश्न: एक बिंदु आवेश $5 \times 10^{-9} \text{ C}$ से 10 cm दूरी पर विद्युत विभव ज्ञात कीजिए. उत्तर: $q = 5 \times 10^{-9} \text{ C}$. $r = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m}$. विद्युत विभव $V = k \frac{q}{r} = (9 \times 10^9) \frac{5 \times 10^{-9}}{0.1} = 9 \times 50 = 450 \text{ V}$. प्रश्न: एक समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी 2 mm है और प्लेटों का क्षेत्रफल $100 \text{ cm}^2$ है. यदि प्लेटों के बीच परावैद्युतांक 4 का पदार्थ भरा है, तो संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए. ($\epsilon_0 = 8.85 \times 10^{-12} \text{ F/m}$). उत्तर: दूरी $d = 2 \text{ mm} = 2 \times 10^{-3} \text{ m}$. क्षेत्रफल $A = 100 \text{ cm}^2 = 100 \times 10^{-4} \text{ m}^2 = 10^{-2} \text{ m}^2$. परावैद्युतांक $K = 4$. धारिता $C = \frac{K\epsilon_0 A}{d} = \frac{4 \times (8.85 \times 10^{-12}) \times 10^{-2}}{2 \times 10^{-3}} = \frac{4 \times 8.85 \times 10^{-14}}{2 \times 10^{-3}} = 2 \times 8.85 \times 10^{-11} = 17.7 \times 10^{-11} \text{ F} = 177 \text{ pF}$. प्रश्न: विद्युत क्षेत्र $\vec{E} = (3x^2 \hat{i} + 2y \hat{j}) \text{ N/C}$ द्वारा बिंदु (1,1,0) से (2,3,0) तक एक इकाई धनात्मक आवेश को ले जाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए. उत्तर: कार्य $W = -\int \vec{E} \cdot d\vec{l}$. चूंकि यह एक संरक्षी क्षेत्र है, हम विभव अंतर का उपयोग कर सकते हैं: $W = -(V_B - V_A) = V_A - V_B$. हम जानते हैं $E_x = -\frac{\partial V}{\partial x}$ और $E_y = -\frac{\partial V}{\partial y}$. $V = -\int E_x dx - \int E_y dy = -\int 3x^2 dx - \int 2y dy = -(x^3 + y^2) + C$. $V(x,y) = -(x^3 + y^2)$. (स्थिरांक को शून्य मान सकते हैं क्योंकि हम अंतर ले रहे हैं) $V_A = V(1,1) = -(1^3 + 1^2) = -(1+1) = -2 \text{ V}$. $V_B = V(2,3) = -(2^3 + 3^2) = -(8+9) = -17 \text{ V}$. किया गया कार्य $W = V_A - V_B = -2 - (-17) = -2 + 17 = 15 \text{ J}$. प्रश्न: 10 cm भुजा वाले एक घन के केंद्र पर $1 \mu C$ का आवेश रखा गया है. घन की एक फलक (face) से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स ज्ञात कीजिए. उत्तर: गॉस के नियम के अनुसार, एक बंद सतह से गुजरने वाला कुल फ्लक्स $\Phi_E = \frac{Q_{enc}}{\epsilon_0}$. यहां, $Q_{enc} = 1 \mu C = 1 \times 10^{-6} \text{ C}$. कुल फ्लक्स जो पूरे घन से गुजरता है $\Phi_{total} = \frac{1 \times 10^{-6}}{\epsilon_0}$. एक घन में 6 समान फलक होते हैं. समरूपता के कारण, प्रत्येक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स समान होगा. एक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स $\Phi_{face} = \frac{1}{6} \Phi_{total} = \frac{1}{6} \frac{1 \times 10^{-6}}{\epsilon_0}$. $\epsilon_0 \approx 8.854 \times 10^{-12} \text{ F/m}$. $\Phi_{face} = \frac{1 \times 10^{-6}}{6 \times 8.854 \times 10^{-12}} = \frac{10^6}{53.124} \approx 1.88 \times 10^4 \text{ N m}^2/\text{C}$.