### प्रोटोजोआ (Protozoa) प्रोटोजोआ एकल-कोशिका वाले यूकेरियोटिक जीव होते हैं। ये दूषित भोजन/पानी, कीट वाहक और सीधे संपर्क जैसे विभिन्न माध्यमों से फैल सकते हैं। #### आंतों के प्रोटोजोआ (Intestinal Protozoa) - **_एंटअमीबा हिस्टोलिटिका_ (_Entamoeba histolytica_)**: **अमीबियासिस** का कारण बनता है। लक्षणों में स्पर्शोन्मुख वाहक से लेकर गंभीर पेचिश, कोलाइटिस और यकृत फोड़े तक शामिल हैं। - **_गियार्डिया लैम्ब्लिया_ (_Giardia lamblia_)**: **गियार्डियासिस** का कारण बनता है। यह पुरानी दस्त, पेट में ऐंठन, पेट फूलना और कुअवशोषण की विशेषता है। - **_क्रिप्टोस्पोरिडियम पार्वम_ (_Cryptosporidium parvum_)**: **क्रिप्टोस्पोरिडियोसिस** का कारण बनता है। यह पानी वाले दस्त का कारण बनता है, विशेष रूप से कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में गंभीर और लंबे समय तक रहता है। #### रक्त और ऊतक प्रोटोजोआ (Blood and Tissue Protozoa) - **_प्लास्मोडियम_ प्रजातियाँ (_P. falciparum, P. vivax, P. ovale, P. malariae, P. knowlesi_)**: **मलेरिया** का कारण बनती हैं। यह एनोफिलीज मच्छरों द्वारा फैलता है। लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, पसीना, सिरदर्द और एनीमिया शामिल हैं। इससे मस्तिष्क मलेरिया जैसी गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं। - **_ट्रिपैनोसोमा ब्रूसी_ (_rhodesiense_ और _gambiense_)**: **अफ्रीकी ट्रिपैनोसोमियासिस (स्लीपिंग सिकनेस)** का कारण बनता है। यह सीसी मक्खियों द्वारा फैलता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण होते हैं और अनुपचारित रहने पर अंततः मृत्यु हो जाती है। - **_ट्रिपैनोसोमा क्रूज़ी_ (_Trypanosoma cruzi_)**: **अमेरिकी ट्रिपैनोसोमियासिस (चागास रोग)** का कारण बनता है। यह ट्रायटोमाइन बग्स द्वारा फैलता है। यह तीव्र लक्षण (बुखार, सूजन) और हृदय और पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाली पुरानी जटिलताएँ पैदा कर सकता है। - **_लीशमैनिया_ प्रजातियाँ (_Leishmania_ species)**: **लीशमैनियासिस** का कारण बनती हैं। यह सैंडफ्लाइज द्वारा फैलता है। यह त्वचीय (त्वचा के घाव), श्लेष्मत्वचीय (श्लेष्म झिल्ली का विनाश), या आंतों के (आंतरिक अंगों को प्रभावित करने वाले, जैसे काला-अजार) रूपों में प्रकट हो सकता है। - **_टोक्सोप्लाज्मा गोंडी_ (_Toxoplasma gondii_)**: **टोक्सोप्लाज्मोसिस** का कारण बनता है। यह अधपके मांस या बिल्ली के मल से प्राप्त होता है। आमतौर पर स्पर्शोन्मुख होता है लेकिन कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में गंभीर बीमारी (एन्सेफलाइटिस) और जन्मजात संक्रमण (जन्म दोष) पैदा कर सकता है। #### मूत्रजननांगी प्रोटोजोआ (Urogenital Protozoa) - **_ट्राइकोमोनास वेजिनेलिस_ (_Trichomonas vaginalis_)**: **ट्राइकोमोनियासिस** का कारण बनता है। यह एक यौन संचारित संक्रमण है जो महिलाओं में वेजिनाइटिस (खुजली, स्राव) और पुरुषों में अक्सर स्पर्शोन्मुख मूत्रमार्गशोथ का कारण बनता है। ### हेल्मिंथ (कृमि) (Helminths - Worms) हेल्मिंथ बहुकोशिकीय परजीवी कृमि होते हैं। इन्हें मोटे तौर पर नेमाटोड (गोलकृमि), ट्रेमाटोड (फ्लूक), और सेस्टोड (फीताकृमि) में वर्गीकृत किया जाता है। #### नेमाटोड (गोलकृमि) (Nematodes - Roundworms) - **_एस्केरिस लुम्ब्रिकोइडेस_ (_Ascaris lumbricoides_)**: **एस्केरियासिस** का कारण बनता है। आंतों का संक्रमण, पेट दर्द, कुपोषण और आंतों में रुकावट हो सकती है। फेफड़ों में प्रवास से न्यूमोनाइटिस हो सकता है। - **_एंकिलोस्टोमा डुओडेनेल_ और _नेकेटर अमेरिकन_ (_Ancylostoma duodenale_ and _Necator americanus_)**: **हुकवर्म संक्रमण** का कारण बनते हैं। लार्वा त्वचा में प्रवेश करते हैं। आंतों का संक्रमण एनीमिया, पेट दर्द और प्रोटीन की कमी का कारण बनता है। - **_एंटेरोबियस वर्मिकुलरिस_ (_Enterobius vermicularis_)**: **एंटेरोबियासिस (पिनवर्म संक्रमण)** का कारण बनता है। बच्चों में आम है, जिससे गुदा में खुजली होती है। - **_स्ट्रॉन्गिलोइडेस स्टर्कोरालिस_ (_Strongyloides stercoralis_)**: **स्ट्रॉन्गिलोइडियासिस** का कारण बनता है। यह पुरानी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण और कमजोर प्रतिरक्षा वाले मेजबानों में संभावित रूप से जानलेवा हाइपरइन्फेक्शन सिंड्रोम का कारण बन सकता है। - **_ट्राइचुरिस ट्राइचिउरा_ (_Trichuris trichiura_)**: **ट्राइचुरियासिस (व्हिपवर्म संक्रमण)** का कारण बनता है। आंतों का संक्रमण, भारी संक्रमण से खूनी दस्त, एनीमिया और गुदा का बाहर निकलना हो सकता है। - **_वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी_, _ब्रूगिया मलाई_, _ब्रूगिया तिमोरी_ (_Wuchereria bancrofti_, _Brugia malayi_, _Brugia timori_)**: **लिम्फेटिक फाइलेरियासिस** का कारण बनते हैं। मच्छरों द्वारा फैलता है। इससे लिम्फेडेमा, एलिफेंटियासिस और हाइड्रोसील होता है। - **_ओंकोसेर्का वोल्वुलास_ (_Onchocerca volvulus_)**: **ओंकोसेर्कासिस (नदी अंधापन)** का कारण बनता है। ब्लैकफ्लाइज द्वारा फैलता है। त्वचा के घाव, तीव्र खुजली और अपरिवर्तनीय अंधापन का कारण बनता है। - **_लोआ लोआ_ (_Loa loa_)**: **लोआसिस (अफ्रीकी नेत्र कृमि)** का कारण बनता है। हिरण मक्खियों द्वारा फैलता है। वयस्क कृमियों का त्वचा के नीचे या आंख के कंजाक्तिवा में प्रवास। - **_ड्रैकुंकुलस मेडिनेन्सिस_ (_Dracunculus medinensis_)**: **ड्रैकुंकुलियासिस (गिनी कृमि रोग)** का कारण बनता है। दूषित पानी पीने से प्राप्त होता है। इससे आमतौर पर पैरों पर दर्दनाक छाला होता है, जिससे कृमि निकलता है। #### ट्रेमाटोड (फ्लूक) (Trematodes - Flukes) - **_शिस्टोसोमा_ प्रजातियाँ (_S. mansoni, S. haematobium, S. japonicum_)**: **शिस्टोसोमियासिस (बिल्हारज़िया)** का कारण बनती हैं। दूषित ताजे पानी के संपर्क से प्राप्त होता है। लक्षण प्रजातियों के अनुसार भिन्न होते हैं लेकिन इसमें मूत्र पथ का रोग (हेमाट्यूरिया, मूत्राशय के कैंसर का खतरा), आंतों का रोग (दस्त, यकृत फाइब्रोसिस), और न्यूरोलॉजिकल जटिलताएँ शामिल हैं। - **_फैसिओला हेपेटिका_ (_Fasciola hepatica_)**: **फैसिओलियासिस (यकृत फ्लूक संक्रमण)** का कारण बनता है। दूषित जलीय पौधों को खाने से प्राप्त होता है। इससे यकृत को नुकसान, बुखार और पेट दर्द होता है। - **_क्लोनोरकिस सिनेंसिस_ और _ओपिस्थोरकिस_ प्रजातियाँ (_Clonorchis sinensis_ and _Opisthorchis_ species)**: **क्लोनोरकियासिस/ओपिस्थोरकियासिस (चीनी/दक्षिणपूर्व एशियाई यकृत फ्लूक)** का कारण बनती हैं। कच्चे या अधपके मछली खाने से प्राप्त होता है। इससे पित्त नलिकाओं की सूजन, पित्त पथरी और पित्तवाहिनी कैंसर हो सकता है। - **_पेरागोनिमस_ प्रजातियाँ (_Paragonimus_ species)**: **पेरागोनिमियासिस (फेफड़े का फ्लूक संक्रमण)** का कारण बनती हैं। कच्चे या अधपके केकड़े या क्रेफ़िश खाने से प्राप्त होता है। इससे पुरानी खांसी, सीने में दर्द और रक्तस्राव होता है, जो तपेदिक जैसा दिखता है। #### सेस्टोड (फीताकृमि) (Cestodes - Tapeworms) - **_टीनिया सगीनाटा_ (गोमांस फीताकृमि) और _टीनिया सोलियम_ (सुअर का फीताकृमि)**: - **टीनियासिस**: आंतों का संक्रमण, आमतौर पर स्पर्शोन्मुख या हल्के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल असुविधा। - **सिस्टिसेरकोसिस (_T. solium_ केवल)**: तब होता है जब मनुष्य _T. solium_ के अंडे खाते हैं, जिससे ऊतकों में लार्वा सिस्ट बनते हैं, खासकर मस्तिष्क (न्यूरोसिस्टिसेरकोसिस) में, जिससे दौरे और न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ होती हैं। - **_इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस_ (_Echinococcus granulosus_)**: **सिस्टिक इचिनोकोकोसिस (हाइडैटिड रोग)** का कारण बनता है। कुत्ते के मल को निगलने से प्राप्त होता है। मुख्य रूप से यकृत और फेफड़ों में बड़े हाइडैटिड सिस्ट बनाता है। - **_इचिनोकोकस मल्टीलोक्युलरिस_ (_Echinococcus multilocularis_)**: **एल्वेओलर इचिनोकोकोसिस** का कारण बनता है। अधिक आक्रामक, मुख्य रूप से यकृत में ट्यूमर जैसे घाव बनाता है। - **_हाइमेनोलेपिस नाना_ (_Hymenolepis nana_)**: **हाइमेनोलेपियासिस (बौना फीताकृमि संक्रमण)** का कारण बनता है। बच्चों में आम है, जिससे पेट में असुविधा और दस्त हो सकता है। - **_डिफिलोबोथ्रियम लैटम_ (_Diphyllobothrium latum_)**: **डिफिलोबोथ्रियोसिस (मछली फीताकृमि संक्रमण)** का कारण बनता है। कच्चे या अधपके मछली खाने से प्राप्त होता है। इससे पेट में असुविधा और विटामिन बी12 की कमी (मेगालोब्लास्टिक एनीमिया) हो सकती है। ### एक्टोपैरासाइट्स (बाह्य परजीवी) (Ectoparasites) ये परजीवी मेजबान की बाहरी सतह पर रहते हैं, लेकिन उनके रोग अक्सर उनके भोजन के सीधे प्रभावों या अन्य रोगजनकों के वाहक के रूप में कार्य करने के कारण होते हैं। - **टिक्स (_Ixodes_, _Dermacentor_, _Amblyomma_ प्रजातियाँ)**: **लाइम रोग** (_बोरेलिया बर्गडोरफेरी_ के माध्यम से), **रॉकी माउंटेन स्पॉटेड फीवर** (_रिकेट्सिया रिकेट्सी_ के माध्यम से), **एर्लिकियासिस**, **एनाप्लाज्मोसिस**, और **टुलारेमिया** का कारण बन सकते हैं। - **मच्छर (_एनोफिलीज_, _एडीस_, _क्यूलेक्स_ प्रजातियाँ)**: **मलेरिया** (प्रोटोजोआ), **डेंगू बुखार**, **जीका वायरस**, **चिकनगुनिया**, **पीत ज्वर**, और **वेस्ट नाइल वायरस** के वाहक। - **पिस्सू (_पुलेक्स इरिटेंस_, _ज़ेनोप्सिला चेओपिस_)**: **पिस्सू-जनित टाइफस** (_रिकेट्सिया टाइफी_ के माध्यम से) और **प्लेग** (_येर्सिनिया पेस्टिस_ के माध्यम से) का कारण बन सकते हैं। - **जूँ (_पेडिकुलस ह्यूमनस कैपिटिस_, _P. humanus कॉर्पोरिस_, _एफ. प्यूबिस_)**: **पेडिकुलोसिस (जूँ का संक्रमण)** का कारण बनते हैं, जिससे खुजली और त्वचा में जलन होती है। शरीर की जूँ **महामारी टाइफस** (_रिकेट्सिया प्रोवाज़ेकी_ के माध्यम से) फैला सकती हैं। - **माइट्स (_सारकोप्टेस स्कैबी_ (_Sarcoptes scabiei_)**: **खुजली (स्कैबीज)** का कारण बनती हैं। त्वचा में माइट्स के बिल बनाने के कारण तीव्र खुजली और चकत्ते की विशेषता है।