पदार्थ और उसका वर्गीकरण (Matter and Its Classification) पदार्थ (Matter): हर वह वस्तु जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरती है, पदार्थ कहलाती है। उदाहरण: हवा, भोजन, पत्थर, बादल, तारे, पौधे, पशु, पानी की बूंद, रेत का कण। प्राचीन भारतीय दार्शनिकों का वर्गीकरण: पदार्थ को 'पंचतत्व' (वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश) में वर्गीकृत किया गया। उनके अनुसार, सभी सजीव और निर्जीव वस्तुएं इन्हीं पंचतत्वों से बनी हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों का वर्गीकरण: पदार्थ को भौतिक गुणधर्मों और रासायनिक प्रकृति के आधार पर दो प्रकार से वर्गीकृत किया गया है। इस अध्याय में भौतिक गुणों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पदार्थ का भौतिक स्वरूप (Physical Nature of Matter) 1. पदार्थ कणों से मिलकर बना होता है (Matter is made up of particles) पहले दो विचारधाराएं थीं: एक का मानना था कि पदार्थ लकड़ी के टुकड़े की तरह सतत होते हैं। दूसरी का मानना था कि पदार्थ रेत के कणों से मिलकर बने होते हैं। प्रयोग (Activity 1.1): पानी में नमक/शक्कर घोलना। नमक/शक्कर के कण पानी के कणों के बीच के रिक्त स्थानों में समाविष्ट हो जाते हैं, जिससे पानी का स्तर नहीं बदलता। यह दर्शाता है कि पदार्थ कणों से बना है। 2. पदार्थ के कण कितने छोटे होते हैं? (How small are these particles of matter?) प्रयोग (Activity 1.2): पोटैशियम परमैंगनेट का तनुकरण (Dilution of Potassium Permanganate). पोटैशियम परमैंगनेट के बहुत थोड़े से क्रिस्टलों से भी पानी की बड़ी मात्रा (जैसे 1000 mL) रंगीन हो जाती है। यह दर्शाता है कि पोटैशियम परमैंगनेट के एक क्रिस्टल में कई सूक्ष्म कण होते हैं, और ये कण छोटे-छोटे कणों में विभाजित होते रहते हैं, जो कल्पना से भी छोटे होते हैं। डिटॉल के साथ भी यही प्रयोग किया जा सकता है। पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण (Characteristics of Particles of Matter) 1. पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है (Particles of matter have space between them) नमक, शक्कर, डिटॉल या पोटैशियम परमैंगनेट के कण पानी में समान रूप से वितरित हो जाते हैं। चाय, कॉफी, या नींबू पानी बनाते समय, एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों के रिक्त स्थानों में समाविष्ट हो जाते हैं। यह सिद्ध करता है कि पदार्थ के कणों के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होता है। 2. पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं (Particles of matter are continuously moving) प्रयोग (Activity 1.3): अगरबत्ती की सुगंध। बुझी हुई अगरबत्ती की सुगंध लेने के लिए पास जाना पड़ता है, जबकि जलती हुई अगरबत्ती की सुगंध दूर से ही आती है। यह कणों की गतिशीलता दर्शाता है। प्रयोग (Activity 1.4): स्याही और शहद का पानी में घुलना। स्याही पानी में जल्दी फैल जाती है जबकि शहद धीरे-धीरे। यह कणों की गति को दर्शाता है। प्रयोग (Activity 1.5): कॉपर सल्फेट या पोटैशियम परमैंगनेट का गर्म और ठंडे पानी में घुलना। गर्म पानी में क्रिस्टल तेजी से घुलते हैं। निष्कर्ष: पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं, अर्थात् उनमें गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) होती है। तापमान बढ़ने से कणों की गति तेज हो जाती है, जिससे गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है। विसरण (Diffusion): दो विभिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना विसरण कहलाता है। गर्म करने पर विसरण तेज हो जाता है। 3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (Particles of matter attract each other) प्रयोग (Activity 1.6): मानव-श्रृंखला खेल। जो समूह एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए था (जैसे ईद-मिशमी नर्तक), उसे तोड़ना सबसे मुश्किल था। यह कणों के बीच आकर्षण बल को दर्शाता है। प्रयोग (Activity 1.7): लोहे की कील, चॉक का टुकड़ा, रबर बैंड। लोहे की कील को तोड़ना मुश्किल है, चॉक को आसानी से तोड़ा जा सकता है, रबर बैंड को खींचा जा सकता है। यह आकर्षण बल के सामर्थ्य में अंतर को दर्शाता है। प्रयोग (Activity 1.8): पानी की सतह को उंगली से काटना। पानी की सतह नहीं कटती क्योंकि पानी के कणों के बीच आकर्षण बल होता है। निष्कर्ष: पदार्थ के कणों के बीच एक बल कार्य करता है जो उन्हें एक साथ रखता है। इस आकर्षण बल का सामर्थ्य प्रत्येक पदार्थ में अलग-अलग होता है। पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter) पदार्थ मुख्य रूप से तीन रूपों में होता है: ठोस, द्रव और गैस। ये अवस्थाएँ उसके कणों की विभिन्न विशेषताओं के कारण होती हैं। 1. ठोस अवस्था (The Solid State) प्रयोग (Activity 1.9): पेन, किताब, सुई, लकड़ी की छड़। इन सभी का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ तथा स्थिर आयतन (नगण्य संपीड्यता) होता है। बाह्य बल लगाने पर ठोस टूट सकते हैं लेकिन उनका आकार नहीं बदलता। इसलिए वे दृढ़ (rigid) होते हैं। विसरण संभव नहीं होता। कुछ विशेष ठोस: रबर बैंड: बल लगाने पर आकार बदलता है, बल हटाने पर वापस मूल आकार में आ जाता है। अत्यधिक बल लगाने पर टूट जाता है। शक्कर/नमक: किसी भी बर्तन में रखने पर उनके क्रिस्टलों का आकार नहीं बदलता। स्पंज: इसमें बहुत छोटे छिद्र होते हैं जिनमें वायु समाहित होती है। दबाने पर वायु बाहर निकलती है, जिससे इसका संपीडन संभव होता है। 2. द्रव अवस्था (The Liquid State) प्रयोग (Activity 1.10): पानी, तेल, दूध, जूस, शीतल पेय को विभिन्न आकार के बर्तनों में डालना। द्रव का आकार निश्चित नहीं होता लेकिन आयतन निश्चित होता है। जिस बर्तन में रखे जाते हैं, वे उसी का आकार ले लेते हैं। द्रवों में बहाव होता है और इनका आकार बदलता है, इसलिए ये दृढ़ नहीं बल्कि तरल (fluid) होते हैं। ठोस और द्रव का विसरण द्रवों में संभव है। वायुमंडल की गैसें भी जल में घुल जाती हैं (जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड जलीय जंतुओं के लिए अनिवार्य हैं)। ठोसों की अपेक्षा द्रवों में विसरण की दर अधिक होती है, क्योंकि द्रव अवस्था में पदार्थ के कण स्वतंत्र रूप से गति करते हैं और ठोस की अपेक्षा द्रवों के कणों में रिक्त स्थान भी अधिक होता है। 3. गैसीय अवस्था (The Gaseous State) प्रयोग (Activity 1.11): पिस्टन युक्त सिरिंज में हवा, पानी, चॉक भरना। ठोसों एवं द्रवों की तुलना में गैसों की संपीड्यता (compressibility) काफी अधिक होती है। उदाहरण: LPG (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस), अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर, CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस)। गैसीय अवस्था में कणों की गति अनियमित और अत्यधिक तीव्र होती है। कण आपस में एवं बर्तन की दीवारों से टकराते हैं। बर्तन की दीवार पर गैस कणों द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगे बल के कारण गैस का दबाव (pressure) बनता है। कणों की तेज गति और अत्यधिक रिक्त स्थानों के कारण गैसों का अन्य गैसों में विसरण बहुत तीव्रता से होता है (जैसे पके हुए भोजन की गंध का फैलना)। पदार्थ की अवस्थाओं का अंतर-रूपांतरण (Interconversion of States of Matter) पदार्थ अपनी अवस्था बदल सकता है (ठोस $\leftrightarrow$ द्रव $\leftrightarrow$ गैस)। अवस्था परिवर्तन तापमान और दाब में परिवर्तन से किया जा सकता है। 1. तापमान परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Change of Temperature) प्रयोग (Activity 1.12): बर्फ को गर्म करना और फिर पानी को उबालना। गलनांक (Melting Point): वह न्यूनतम तापमान जिस पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है। बर्फ का गलनांक $273.15 K$ ($0^\circ C$) है। संलयन (Fusion): ठोस से द्रव अवस्था में परिवर्तन की प्रक्रिया। प्रसुप्त ऊष्मा (Latent Heat): गलने की प्रक्रिया के दौरान तापमान समान रहता है। यह ऊष्मीय ऊर्जा कणों के पारस्परिक आकर्षण बल को वशीभूत करके पदार्थ की अवस्था बदलने में उपयोग होती है। इसे 'संलयन की प्रसुप्त ऊष्मा' कहते हैं। $0^\circ C$ पर जल के कणों की ऊर्जा उसी तापमान पर बर्फ के कणों की ऊर्जा से अधिक होती है। क्वथनांक (Boiling Point): वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है और गैस में बदल जाता है। जल का क्वथनांक $373 K$ ($100^\circ C$) है। वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा: वह ऊष्मा जो $1 kg$ द्रव को वायुमंडलीय दाब और उसके क्वथनांक पर गैसीय अवस्था में बदलने हेतु आवश्यक होती है। $100^\circ C$ पर भाप के कणों में पानी के कणों की अपेक्षा अधिक ऊर्जा होती है। ऊर्ध्वपातन (Sublimation): द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस में बदलना। उदाहरण: कपूर (Activity 1.13), नेफ्थलीन, अमोनियम क्लोराइड। निक्षेपण (Deposition): गैस से सीधे ठोस में बदलना। 2. दाब परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Change of Pressure) दाब बढ़ाने और तापमान घटाने से गैस द्रव में बदल सकती है। (चित्र 1.8) ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (Dry Ice): इसे उच्च दाब पर संग्रहित किया जाता है। जब वायुमंडलीय दाब 1 ATM हो, तो ठोस $CO_2$ द्रव अवस्था में आए बिना सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है। वाष्पीकरण (Evaporation) परिभाषा: क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव के वाष्प में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। यह एक सतही परिघटना है। द्रव की सतह पर स्थित कणों में इतनी गतिज ऊर्जा होती है कि वे दूसरे कणों के आकर्षण बल से मुक्त होकर वाष्प में बदल जाते हैं। वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Evaporation) सतह क्षेत्र बढ़ने पर: वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है (जैसे कपड़े सुखाने के लिए फैलाना)। तापमान में वृद्धि: तापमान बढ़ने पर अधिक कणों को पर्याप्त गतिज ऊर्जा मिलती है, जिससे वे वाष्पीकृत हो जाते हैं। आर्द्रता में कमी: वायु में जलवाष्प की मात्रा कम होने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। वायु की गति में वृद्धि: तेज वायु में जलवाष्प के कण वायु के साथ उड़ जाते हैं, जिससे आसपास के जल-वाष्प की मात्रा घट जाती है और वाष्पीकरण तेज होता है (जैसे तेज हवा में कपड़े जल्दी सूखते हैं)। वाष्पीकरण के कारण शीतलता (Cooling Due to Evaporation) खुले बर्तन में रखे द्रव में निरंतर वाष्पीकरण होता रहता है। वाष्पीकरण के दौरान, कम हुई ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने के लिए द्रव के कण अपने आसपास से ऊर्जा अवशोषित कर लेते हैं। इस तरह आसपास से ऊर्जा के अवशोषित होने के कारण शीतलता उत्पन्न होती है। उदाहरण: एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर) हथेली पर गिराने पर शीतलता महसूस होती है। गर्म दिनों में छत या खुले स्थान पर पानी छिड़कना। गर्मियों में सूती कपड़े पहनना: शारीरिक प्रक्रिया के कारण पसीना आता है, जो वाष्पीकृत होकर शरीर से ऊष्मा अवशोषित करता है और शीतलता प्रदान करता है। सूती कपड़े पसीने को आसानी से अवशोषित और वाष्पीकृत करते हैं। बर्फीले जल से भरे गिलास की बाहरी सतह पर जल की बूंदें: वायु में उपस्थित जलवाष्प की ऊर्जा ठंडे पानी के संपर्क में आकर कम हो जाती है और यह द्रव अवस्था में बदलकर बूंदों के रूप में दिखाई देती है (संघनन)। मापने योग्य राशियाँ और उनके मात्रक (Measurable Quantities and Their Units) राशि (Quantity) मात्रक (Unit) प्रतीक (Symbol) तापमान (Temperature) केल्विन (Kelvin) $K$ लंबाई (Length) मीटर (Meter) $m$ संहति (Mass) किलोग्राम (Kilogram) $kg$ भार (Weight) न्यूटन (Newton) $N$ आयतन (Volume) घन मीटर (Cubic meter) $m^3$ घनत्व (Density) किलोग्राम प्रति घनमीटर (Kilogram per cubic meter) $kg\,m^{-3}$ दाब (Pressure) पास्कल (Pascal) $Pa$ $1 L = 1 dm^3 = 1000 mL = 10^3 cm^3$ $0^\circ C = 273.15 K \approx 273 K$ $1 atm = 1.01 \times 10^5 Pa$