यूनिट-I: अदिश और सदिश क्षेत्र क्षेत्र की अवधारणा अदिश क्षेत्र: एक क्षेत्र जहाँ प्रत्येक बिंदु पर एक अदिश मान (जैसे तापमान या दाब) जुड़ा होता है। उदाहरण: तापमान वितरण $T(x,y,z)$। सदिश क्षेत्र: एक क्षेत्र जहाँ प्रत्येक बिंदु पर एक सदिश मान (जैसे वेग या बल) जुड़ा होता है। उदाहरण: विद्युत क्षेत्र $\vec{E}(x,y,z)$। अदिश क्षेत्र का ग्रेडिएंट परिभाषा: ग्रेडिएंट एक अदिश क्षेत्र की अधिकतम वृद्धि की दिशा और दर को दर्शाता है। $\nabla \phi = \frac{\partial \phi}{\partial x}\hat{i} + \frac{\partial \phi}{\partial y}\hat{j} + \frac{\partial \phi}{\partial z}\hat{k}$ भौतिक महत्व: यह अदिश क्षेत्र की सबसे तीव्र परिवर्तन की दिशा को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, तापमान के ग्रेडिएंट की दिशा वह दिशा है जिसमें तापमान सबसे तेजी से बढ़ता है। सदिश क्षेत्र का डाइवर्जेंस परिभाषा: डाइवर्जेंस एक सदिश क्षेत्र के स्रोत या सिंक की मात्रा को मापता है। $\nabla \cdot \vec{A} = \frac{\partial A_x}{\partial x} + \frac{\partial A_y}{\partial y} + \frac{\partial A_z}{\partial z}$ भौतिक महत्व: यदि $\nabla \cdot \vec{A} > 0$, तो उस बिंदु पर एक स्रोत है (क्षेत्र बाहर की ओर फैलता है)। यदि $\nabla \cdot \vec{A} सदिश क्षेत्र का कर्ल परिभाषा: कर्ल एक सदिश क्षेत्र के घूर्णन या परिसंचरण की मात्रा को मापता है। $\nabla \times \vec{A} = \left(\frac{\partial A_z}{\partial y} - \frac{\partial A_y}{\partial z}\right)\hat{i} + \left(\frac{\partial A_x}{\partial z} - \frac{\partial A_z}{\partial x}\right)\hat{j} + \left(\frac{\partial A_y}{\partial x} - \frac{\partial A_x}{\partial y}\right)\hat{k}$ भौतिक महत्व: यह दर्शाता है कि सदिश क्षेत्र किसी बिंदु के चारों ओर कितना घूमता है। यदि $\nabla \times \vec{A} = 0$, तो क्षेत्र रूढ़िवादी है (कोई घूर्णन नहीं)। ठोस कोण परिभाषा: एक त्रिविमीय कोण जो किसी सतह द्वारा किसी बिंदु पर बनाया जाता है। $\Omega = \int_S \frac{\hat{r} \cdot d\vec{A}}{r^2}$ महत्व: यह गाउस के नियम को समझने में महत्वपूर्ण है। एक बंद सतह द्वारा किसी आंतरिक बिंदु पर बनाया गया अधिकतम ठोस कोण $4\pi$ होता है। गाउस डाइवर्जेंस प्रमेय प्रमेय: किसी सदिश क्षेत्र का एक बंद सतह पर पृष्ठीय समाकलन, उस क्षेत्र के डाइवर्जेंस के आयतन समाकलन के बराबर होता है जो उस सतह से घिरा होता है। $\oint_S \vec{A} \cdot d\vec{A} = \int_V (\nabla \cdot \vec{A}) dV$ उपयोग: यह पृष्ठीय समाकलनों को आयतन समाकलनों में बदलने के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे गणना सरल हो जाती है। विशेष रूप से, यह विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के लिए गाउस के नियम का अभिन्न और अवकल रूप देता है। स्टोक्स प्रमेय प्रमेय: किसी सदिश क्षेत्र का एक बंद लूप पर रेखीय समाकलन, उस क्षेत्र के कर्ल के पृष्ठीय समाकलन के बराबर होता है जो उस लूप से घिरा होता है। $\oint_C \vec{A} \cdot d\vec{l} = \int_S (\nabla \times \vec{A}) \cdot d\vec{A}$ उपयोग: यह रेखीय समाकलनों को पृष्ठीय समाकलनों में बदलने के लिए उपयोगी है, और यह फैराडे के प्रेरण के नियम और एम्पीयर के नियम के अवकल रूपों की व्युत्पत्ति में महत्वपूर्ण है। व्युत्क्रम वर्ग नियम से गाउस का नियम गाउस का नियम (विद्युत क्षेत्र के लिए): किसी बंद सतह से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स, सतह द्वारा घिरे कुल आवेश का $\frac{1}{\epsilon_0}$ गुना होता है। $\oint_S \vec{E} \cdot d\vec{A} = \frac{Q_{enc}}{\epsilon_0}$ व्युत्पत्ति: कूलाम के नियम (जो एक व्युत्क्रम वर्ग नियम है) से, एक बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र $E = \frac{1}{4\pi\epsilon_0}\frac{q}{r^2}\hat{r}$ होता है। इस क्षेत्र के लिए गाउस डाइवर्जेंस प्रमेय का उपयोग करके गाउस के नियम को प्राप्त किया जा सकता है। गाउस के नियम का अवकल रूप अवकल रूप: $\nabla \cdot \vec{E} = \frac{\rho}{\epsilon_0}$ महत्व: यह दर्शाता है कि विद्युत क्षेत्र का डाइवर्जेंस आवेश घनत्व $\rho$ के समानुपाती होता है। यह मैक्सवेल के समीकरणों में से एक है। यूनिट-II: विद्युत क्षेत्र और स्थितिज ऊर्जा आवेश का अपरिवर्तनीयता सिद्धांत: आवेश का अपरिवर्तनीयता का अर्थ है कि एक पृथक प्रणाली में कुल विद्युत आवेश संरक्षित रहता है, अर्थात न तो इसे बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। यह प्रकृति का एक मौलिक संरक्षण नियम है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा (i) असतत N आवेश: N बिंदु आवेशों के एक निकाय की स्थितिज ऊर्जा उन सभी युग्मों की अंतःक्रियात्मक ऊर्जाओं का योग होती है। $U = \frac{1}{2} \sum_{i=1}^{N} \sum_{j \neq i}^{N} \frac{k q_i q_j}{|\vec{r}_i - \vec{r}_j|}$ (ii) सतत आवेश वितरण: एक सतत आवेश वितरण की स्थितिज ऊर्जा को आवेश घनत्व के संदर्भ में व्यक्त किया जा सकता है। $U = \frac{1}{2} \int_V \rho(\vec{r}) V(\vec{r}) dV$ जहाँ $V(\vec{r})$ उस बिंदु पर विद्युत विभव है। एकसमान रूप से आवेशित गोले को बनाने के लिए आवश्यक ऊर्जा एक गोले को आवेशित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा उसकी स्वयं की स्थितिज ऊर्जा के बराबर होती है। त्रिज्या $R$ और कुल आवेश $Q$ वाले एकसमान रूप से आवेशित गोले के लिए, स्थितिज ऊर्जा: $U = \frac{3}{5} \frac{k Q^2}{R}$ शास्त्रीय इलेक्ट्रॉन की त्रिज्या: इस अवधारणा का उपयोग एक इलेक्ट्रॉन की शास्त्रीय त्रिज्या का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है, यह मानकर कि इलेक्ट्रॉन एकसमान रूप से आवेशित गोला है। $r_e = \frac{k e^2}{m_e c^2}$ लघु विद्युत द्विध्रुव के कारण विद्युत क्षेत्र एक लघु विद्युत द्विध्रुव (आवेश $q$ और $-q$ दूरी $d$ पर अलग किए गए) का द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p} = q\vec{d}$ होता है। अक्षीय बिंदु पर क्षेत्र: $E_{axial} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{2p}{r^3}$ (द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा में) विषुवतीय बिंदु पर क्षेत्र: $E_{equatorial} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p}{r^3}$ (द्विध्रुव आघूर्ण के विपरीत दिशा में) बाहरी एकसमान और गैर-एकसमान विद्युत क्षेत्र में विद्युत द्विध्रुव एकसमान क्षेत्र में: द्विध्रुव पर एक शुद्ध बल शून्य होता है, लेकिन एक बलाघूर्ण कार्य करता है जो इसे क्षेत्र के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है। $\vec{\tau} = \vec{p} \times \vec{E}$। स्थितिज ऊर्जा $U = -\vec{p} \cdot \vec{E}$। गैर-एकसमान क्षेत्र में: द्विध्रुव पर एक शुद्ध बल और एक बलाघूर्ण दोनों कार्य करते हैं। बल $\vec{F} = (\vec{p} \cdot \nabla)\vec{E}$ या अधिक सामान्यतः $\vec{F} = \nabla(\vec{p} \cdot \vec{E})$ होता है। एकसमान रूप से आवेशित गोलाकार खोल के कारण विभव खोल के बाहर ($r > R$): विभव एक बिंदु आवेश के समान होता है जो केंद्र में स्थित होता है। $V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r}$ खोल पर ($r = R$): $V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R}$ खोल के अंदर ($r विभव स्थिर होता है और सतह पर विभव के बराबर होता है। $V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{R}$ यूनिट-III: पॉइसन और लाप्लास समीकरण कार्तीय निर्देशांक में पॉइसन और लाप्लास समीकरण पॉइसन का समीकरण: $\nabla^2 V = -\frac{\rho}{\epsilon_0}$ जहाँ $V$ विद्युत विभव है और $\rho$ आवेश घनत्व है। यह समीकरण उन क्षेत्रों में विभव का वर्णन करता है जहाँ आवेश मौजूद हैं। लाप्लास का समीकरण: $\nabla^2 V = 0$ यह पॉइसन समीकरण का एक विशेष मामला है जहाँ आवेश घनत्व शून्य होता है ($\rho = 0$)। यह आवेश-मुक्त क्षेत्रों में विद्युत विभव का वर्णन करता है। अनुप्रयोग: इन समीकरणों का उपयोग स्थिरवैद्युतिकी की समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है, जैसे आवेश वितरण या सीमा शर्तों को देखते हुए विद्युत विभव और क्षेत्र का निर्धारण करना। आवेश का अपरिवर्तनीयता (स्थिरवैद्युतिकी के संदर्भ में) यह सिद्धांत बताता है कि एक बंद प्रणाली के भीतर कुल विद्युत आवेश स्थिर रहता है। यह स्थैतिक विद्युत आवेशों के व्यवहार को समझने के लिए मौलिक है, जहाँ आवेश न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं, बल्कि केवल पुनर्वितरित होते हैं। गाउसीय और SI इकाइयाँ और उनके आंतरिक रूपांतरण SI इकाइयाँ (अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली): विद्युत क्षेत्र के लिए न्यूटन/कूलम्ब (N/C) या वोल्ट/मीटर (V/m), आवेश के लिए कूलम्ब (C), विभव के लिए वोल्ट (V), आदि। $\epsilon_0 \approx 8.854 \times 10^{-12}$ F/m। गाउसीय इकाइयाँ (CGS प्रणाली): विद्युत क्षेत्र के लिए स्टेटवोल्ट/सेमी (statV/cm), आवेश के लिए स्टेटकूलम्ब (statC), विभव के लिए स्टेटवोल्ट (statV), आदि। यहाँ $\epsilon_0$ को 1 के रूप में लिया जाता है, और $k = 1$ (या $k = \frac{1}{4\pi}$ तर्कसंगत गाउसीय में)। रूपांतरण: इकाइयों की दो प्रणालियों के बीच रूपांतरण महत्वपूर्ण है, खासकर जब विभिन्न पाठ्यपुस्तकों या ऐतिहासिक संदर्भों से निपटते हैं। उदाहरण के लिए, 1 कूलम्ब $\approx 3 \times 10^9$ स्टेटकूलम्ब। गतिमान फ्रेम में विद्युत क्षेत्र का मापन विशेष सापेक्षता के अनुसार, विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे से संबंधित होते हैं और एक पर्यवेक्षक के जड़त्वीय फ्रेम पर निर्भर करते हैं। यदि एक आवेशित कण एक फ्रेम में केवल विद्युत क्षेत्र का अनुभव करता है, तो एक अलग जड़त्वीय फ्रेम में गतिमान पर्यवेक्षक एक चुंबकीय क्षेत्र के साथ-साथ एक परिवर्तित विद्युत क्षेत्र का भी अनुभव करेगा। लोरेंत्ज़ रूपांतरण: ये समीकरण एक फ्रेम से दूसरे फ्रेम में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों को रूपांतरित करते हैं: $\vec{E}' = \gamma(\vec{E} + \vec{v} \times \vec{B}) - \frac{\gamma^2}{\gamma+1}\vec{v}(\vec{v} \cdot \vec{E})/c^2$ $\vec{B}' = \gamma(\vec{B} - \vec{v} \times \vec{E}/c^2) - \frac{\gamma^2}{\gamma+1}\vec{v}(\vec{v} \cdot \vec{B})/c^2$ जहाँ $\gamma = \frac{1}{\sqrt{1 - v^2/c^2}}$। स्थिर वेग से गतिमान बिंदु आवेश का विद्युत क्षेत्र एक स्थिर वेग $v$ से गतिमान बिंदु आवेश $q$ का विद्युत क्षेत्र, उस आवेश के चारों ओर विकृत हो जाता है। क्षेत्र रेखाएँ गति की दिशा में संकुचित होती हैं। क्षेत्र के लिए लिएनार्ड-वीचर्ट विभव से प्राप्त एक जटिल अभिव्यक्ति होती है, लेकिन एक सरल सन्निकटन कम वेगों पर वैध है। यह दर्शाता है कि एक गतिमान आवेश न केवल एक विद्युत क्षेत्र, बल्कि एक चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है, जो विद्युत चुम्बकत्व के अंतर्संबंध का एक मौलिक पहलू है। यूनिट-IV: पदार्थ में विद्युत क्षेत्र बहुध्रुव विस्तार परिभाषा: किसी भी आवेश वितरण के कारण उत्पन्न विभव या क्षेत्र को, वितरण के आकार और अभिविन्यास के आधार पर, विभिन्न बहुध्रुव आघूर्णों (एकध्रुव, द्विध्रुव, चतुर्ध्रुव, आदि) के योगदान के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। आवेश वितरण के आघूर्णों की परिभाषा: एकध्रुव आघूर्ण (कुल आवेश): $Q = \int \rho(\vec{r}') dV'$ द्विध्रुव आघूर्ण: $\vec{p} = \int \vec{r}' \rho(\vec{r}') dV'$ चतुर्ध्रुव आघूर्ण: $Q_{ij} = \int (3r'_i r'_j - (r')^2 \delta_{ij}) \rho(\vec{r}') dV'$ महत्व: दूर के बिंदुओं पर क्षेत्र का अनुमान लगाने के लिए उपयोगी है, जहाँ केवल पहले कुछ पद ही महत्वपूर्ण होते हैं। परावैद्युत परिभाषा: परावैद्युत वे पदार्थ होते हैं जो विद्युत रोधक होते हैं और विद्युत क्षेत्र में रखने पर ध्रुवीकृत हो जाते हैं। वे विद्युत ऊर्जा को संग्रहीत कर सकते हैं। प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण: जब एक परावैद्युत को बाहरी विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसके परमाणु या अणु ध्रुवीकृत हो जाते हैं, जिससे उनके अंदर प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न होते हैं। ध्रुवीय और गैर-ध्रुवीय अणु गैर-ध्रुवीय अणु: वे अणु जिनमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के केंद्र संपाती होते हैं (जैसे $\text{O}_2, \text{N}_2, \text{CO}_2$)। बाहरी क्षेत्र की अनुपस्थिति में इनका कोई स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता है। ध्रुवीय अणु: वे अणु जिनमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के केंद्र संपाती नहीं होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है (जैसे $\text{H}_2\text{O}, \text{HCl}$)। मुक्त और बाध्य आवेश मुक्त आवेश: वे आवेश जो किसी पदार्थ में स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं (जैसे धातुओं में चालन इलेक्ट्रॉन)। ये बाहरी विद्युत क्षेत्र के तहत एक धारा का निर्माण करते हैं। बाध्य आवेश: वे आवेश जो परमाणुओं या अणुओं से बंधे होते हैं और केवल सीमित विस्थापन कर सकते हैं (जैसे परावैद्युत में)। बाहरी क्षेत्र के तहत ये ध्रुवीकरण का कारण बनते हैं। ध्रुवीकरण परिभाषा: परावैद्युत पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में प्रेरित या स्थायी विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का नेट योग। $\vec{P} = \text{प्रति इकाई आयतन द्विध्रुव आघूर्ण}$ संबंध: $\vec{P} = \chi_e \epsilon_0 \vec{E}$ जहाँ $\chi_e$ विद्युत संवेदनशीलता है। परमाणु ध्रुवीकरणता परिभाषा: यह एक परमाणु या अणु की बाहरी विद्युत क्षेत्र के जवाब में एक प्रेरित द्विध्रुव आघूर्ण विकसित करने की क्षमता का एक माप है। $\vec{p}_{induced} = \alpha \vec{E}_{local}$ जहाँ $\alpha$ परमाणु ध्रुवीकरणता है। विद्युत विस्थापन सदिश परिभाषा: यह विद्युत क्षेत्र और ध्रुवीकरण को एक साथ जोड़ने वाला एक सहायक सदिश क्षेत्र है, जो परावैद्युत माध्यम में विद्युत क्षेत्र की गणना को सरल बनाता है। $\vec{D} = \epsilon_0 \vec{E} + \vec{P}$ गाउस का नियम (परावैद्युत में): $\nabla \cdot \vec{D} = \rho_f$ जहाँ $\rho_f$ केवल मुक्त आवेश घनत्व है। विद्युत संवेदनशीलता परिभाषा: यह एक पदार्थ की बाहरी विद्युत क्षेत्र के जवाब में ध्रुवीकृत होने की डिग्री का एक माप है। यह $\vec{P}$ और $\vec{E}$ के बीच आनुपातिकता स्थिरांक है। $\vec{P} = \epsilon_0 \chi_e \vec{E}$ परावैद्युत स्थिरांक और उनके बीच संबंध परावैद्युत स्थिरांक (या सापेक्ष पारगम्यता): $K_e = \epsilon_r = 1 + \chi_e$ संबंध: $\vec{D} = \epsilon_0 \vec{E} + \vec{P} = \epsilon_0 \vec{E} + \epsilon_0 \chi_e \vec{E} = \epsilon_0 (1 + \chi_e) \vec{E} = \epsilon_0 \epsilon_r \vec{E} = \epsilon \vec{E}$ जहाँ $\epsilon = \epsilon_0 \epsilon_r$ माध्यम की पूर्ण पारगम्यता है।